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💢नया इंस्टेंट💢विस्तारFollow Usराम मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित राम दरबार का नाम अब आधिकारिक रूप से राम परिवार कर दिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह निर्णय भारतीय संस्कृति और भाषायी शुद्धता को ध्यान में रखते हुए लिया है। ट्रस्ट के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दरबार शब्द उर्दू मूल का है, जबकि राम मंदिर की संकल्पना पूरी तरह सनातन, भारतीय और लोक परंपराओं से जुड़ी हुई है। इसी भाव के अनुरूप अब इसे राम परिवार के नाम से संबोधित किया जाएगा।
️पॉइंट्स पॉइंट्स,बहराइच के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट मैच में बैटिंग करता खिलाड़ी। स्रोत : आयो
विथड्रॉ ऐप, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (एमएमसी जोन) के प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखकर सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को रोकने की अपील की है। इस पत्र में उन्होंने इस बार 'नक्सली सप्ताह' न मनाने की घोषणा भी की है और सरकार से पुनर्वास के लिए समय मांगा है।
सारBanswara:पूर्व मंत्री और वागड़ के दिग्गज नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया एक बार फिर पार्टी बदलने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक, मकर संक्रांति के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में यह घर वापसी संभव है। मालवीया एक बार सांसद, चार बार विधायक और राजस्थान में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकीUpdated Sat, 10 Jan 2026 10:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Tue, 09 Dec 2025 04:06 PM IST
साइन अप विथड्रॉ, बागेश्वर। ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले के लिए शिव की नगरी पूरी तरह सज-धजकर तैयार हो रही है। मेले की तैयारियां अब अपने अंतिम चरणों में हैं। नुमाइश मैदान में मेलार्थियों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले झूलों और चरखों को स्थापित कर दिया गया है। नगर के पुलों को रंग-बिरंगी लाइटों की झालरों से जगमग किया गया है।
इनाम अर्न
सारMeerut News: कपसाड़ कांड में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के मामले रविवार शाम को पारस सोम को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। यहां से 14 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
डिपॉजिट, राजस्थान की माटी का कण-कण शौर्य और गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है, लेकिन बानसूर विधानसभा क्षेत्र में यह गौरव आज अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। ग्राम हाजीपुर और बानसूर मुख्य कस्बे की पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक किले प्रशासनिक उपेक्षा और पुरातत्व विभाग की उदासीनता के चलते खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। जो किले कभी सुरक्षा के अभेद्य कवच और राजपूताना आन-बान-शान के प्रतीक थे, वे आज सरकारी फाइलों में गुम होकर अपना अस्तित्व खो रहे हैं।







