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💢विज़िट💢बीजापुर में व्यापारी संघ की मांग पर कलेक्टर संबित मिश्रा ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए साफ सफाई, सुविधाएं, दवाइयों और स्टाफ की जांच की गई। कलेक्टर ने एक सप्ताह में कमियां दूर करने के निर्देश दिए, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
️दैनिक विज़िट,मध्य प्रदेश में बारिश का स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने से मंगलवार को कई जिलों में तेज बारिश का दौर रहा। इंदौर में 9 घंटे में ढाई इंच से ज्यादा पानी गिरा। जबकि रायसेन और नर्मदापुरम में आधा इंच बारिश हुई। बैतूल, गुना, ग्वालियर, खरगोन, पचमढ़ी, उज्जैन, दमोह, मंडला, सिवनी में भी बारिश हुई। राजधानी भोपाल में भी शाम को तेज बारिश का दौर शुरू हो गया।
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ऑफर, रांची में कांस्य पदक प्राप्त करतीं तीरंदाज वसुधा गुप्ता। स्रोत: स्वयं- फोटो : 1
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के आमगांव में इन दिनों बागेश्वर महाराज श्रीराम कथा के माध्यम से भक्तों को भक्ति-रस का पान करा रहे हैं। कथा के द्वितीय दिवस उन्होंने समाज को झकझोर देने वाले विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। बागेश्वर महाराज ने स्पष्ट किया कि कथाओं से जो धन प्राप्त होता है, उससे मंदिर नहीं बल्कि अस्पताल बनाए जाते हैं। हम सेवा वाला बाबा भी बनना चाहते हैं। अस्पताल इसलिए बनवाते हैं, ताकि किसी भी गरीब को इलाज के नाम पर धर्मांतरण के लिए मजबूर न किया जाए। महाराज ने आह्वान करते हुए कहा कि हम तुम्हारे लिए किडनी तक बेच देंगे, लेकिन तुम धर्मांतरण मत करो।
सारमाओवादी विरोधी अभियान में शहीद आरक्षक दिनेश नाग की पत्नी पूजा नाग को पुलिस सैलरी पैकेज योजना के तहत 1.10 करोड़ रुपये का चेक सौंपा गया। पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में यह आर्थिक सहायता परिवार के लिए संबल और सम्मान का प्रतीक बनी।
प्रीमियम अर्न, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी/कोटाPublished by:बूँदी ब्यूरोUpdated Sun, 28 Sep 2025 11:25 PM IST
ईज़ी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदीPublished by:बूँदी ब्यूरोUpdated Sun, 26 Oct 2025 10:14 PM IST
विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
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