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💢गोल्ड कमेंट💢विस्तारFollow Usमध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित मां ताप्ती का उद्गम स्थल मुलताई धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। अब इसी ऐतिहासिक पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप देने के उद्देश्य से मुलताई का नाम बदलकर ‘मूलतापी’ किए जाने की घोषणा की गई है। यह नाम परिवर्तन मां ताप्ती की प्राचीन विरासत और क्षेत्र की ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
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T20 WCविकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?अंबरनाथ नगर परिषदयूनियन बजट 2026-27भोपाल के रहमान डकैत की पूरी कहानीखुदरा महंगाई दर में उछालJagdeep DhankharShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'
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सारहरियाणा के खान एवं भूविज्ञान और विकास एवं पंचायती राज मंत्री कृष्णलाल पंवार ने चंडीगढ़ में आयोजित पत्रकारवार्ता में कई बिंदुओं पर जानकारी दी। खान एवं भूविज्ञान मंत्री पंवार ने बताया कि अवैध खनन की निगरानी की सबसे अधिक आवश्यकता दूसरे राज्यों के पास है।
विस्तारFollow Usमध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्थित मां ताप्ती का उद्गम स्थल मुलताई धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। अब इसी ऐतिहासिक पहचान को और अधिक प्रामाणिक रूप देने के उद्देश्य से मुलताई का नाम बदलकर ‘मूलतापी’ किए जाने की घोषणा की गई है। यह नाम परिवर्तन मां ताप्ती की प्राचीन विरासत और क्षेत्र की ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
सारसूरजपुर के रामानुजनगर में निजी स्कूल की शिक्षिका ने नर्सरी के छात्र को होमवर्क न करने पर घंटों पेड़ से रस्सी से लटकाए रखा, वीडियो वायरल होने पर अभिभावकों ने हंगामा किया।
कैश रिसीव, पंजाब में लोहड़ी की धूमHaryana Weatherनशा छुड़ाने के नाम पर लूटPhagwaraChandigarhरिकाॅर्डतोड़ ठंड से ठिठुरा चंडीगढ़PunjabChandigarh News
विन कैश बदायूं। मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे पर सोमवार को जिले के हिस्से में रन (स्पीड) ट्रायल किया गया। इस दौरान बिसौली क्षेत्र से चार गाड़ियों को एक्सप्रेस-वे पर उतारा गया। उन्हें 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल पूरी तरह सफल रहा, जिससे एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर भरोसा बढ़ा है।
सारबीकानेर में शुरू हुआ इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल 2026 राजस्थान की जीवंत लोक-संस्कृति और ऊंटों से जुड़ी परंपराओं का भव्य उत्सव बनकर उभरा है। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में सजे-धजे ऊंट, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां, पारंपरिक वेशभूषा, हेरिटेज वॉक और स्थानीय व्यंजनों की खुशबू ने शहर को उत्सव के रंग में रंग दिया है।
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