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💢डिपॉजिट💢सारभिंड जिले में साइबर ठगों ने रिटायर्ड शिक्षक प्रेम सिंह कुशवाह को डिजिटल अरेस्ट कर मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया। फर्जी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर धमकाया और अलग-अलग खातों में 29.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। बाद में ठगी का खुलासा होने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
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बोनस, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Tue, 30 Sep 2025 08:27 AM IST
सारफिलहाल दस्तावेज़ न होने के कारण गोविंद को छिंदवाड़ा के बालगृह भेजा गया है। आरोपी पर बाल श्रम और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 3 महीने से 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है।
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्रामीण अंचल से एक सनसनीखेज वारदात का मामला सामने आया। यहां के ग्राम नावरा में नेपानगर के रहने वाले युवक रईस ने देर रात में हुए विवाद के बाद एक युवती भाग्यश्री की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी गई। मामले की जानकारी लगते ही पुलिस तुरन्त मौके पर पहुंची। मामला दर्ज कर आरोपी युवक को नेपानगर से गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी रईस और युवती का लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसकी जानकारी दोनों के परिजन सहित आसपास के लोगों को भी थी। इसी के साथ ही दोनों के बीच अक्सर छोटी छोटी बातों को लेकर भी विवाद होते रहता था। शुक्रवार देर रात भी किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी रईस ने खौफनाक वारदात को अंजाम देते हुए युवती की गला रेतकर हत्या कर दी और मौके से फरार हो गया।
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अर्न शेयर सारभोपाल में सोमवार को दलित-आदिवासी संगठनों ने भोपाल डिक्लेरेशन-2 के ड्राफ्टिंग सत्र की शुरुआत की। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और SC-ST वर्ग पर अत्याचार के चलते नए डिक्लेरेशन की जरूरत है। ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में देशभर के विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हैं।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:संदीप तिवारीUpdated Mon, 12 Jan 2026 07:16 PM IST
वीडियो कलेक्ट, विस्तारFollow Usजोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल पर कथित हेट स्पीच का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और पुलिस जांच की निगरानी समेत अन्य मांगें करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि चल रही आपराधिक जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी का निर्देश दिया जा सकता है। इसके अलावा जांच के तरीके या वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी जैसे निर्देश देना आपराधिक जांच के माइक्रो मैनेजमेंट जैसा होगा, जो कोर्ट के दायरे में नहीं आता।







