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सारतमिलनाडु लूटकांड के फरार दो आरोपियों मांगीलाल और विक्रम को बालसमुद आरटीओ चेक पोस्ट से बड़वानी जिले की सेंधवा पुलिस ने गिरफ्तार किया। उनके पास से 9.424 किलो सोना, 3.5 लाख रुपये, पिस्टल और कारतूस बरामद हुए। दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर तमिलनाडु पुलिस को सौंपा जाएगा।
कमेंट फ्री, सारबालाघाट में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस और सुरक्षा बलों ने नक्सली डंप का खुलासा किया। 13 सरेंडर नक्सलियों की सूचना पर सर्च ऑपरेशन में 11.57 लाख नकद, आधुनिक हथियार, विस्फोटक और गोला-बारूद बरामद हुआ, जो जिले में पहली बड़ी नकदी जब्ती है।
रविवार की रात नगर में पुराने स्टेट बैंक के सामने स्थित पंडाल के पास मांस का टुकड़ा और हड्डियां सड़क पर फेक जाने के बाद माहौल काफी तनाव पूर्ण हो गया। मामले की शिकायत धार्मिक संगठनों ने थाना प्रभारी से करते हुए इस पर कार्रवाई की मांग की। इसके पश्चात पुलिस ने विभिन्न सीसीटीवी कैमरे से इसकी जांच करने के बाद ऐसा करने वाले स्थानीय व्यापारी के कर्मचारी के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पॉलिथीन के अंदर मास के टुकड़े होने के कारण पंडाल के सामने सड़क पर कुत्ते उसे फैला रहे थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। नगर के धार्मिक संगठनों एवं समिति सदस्यों ने पूरे मामले में जांच की मांग ज्ञापन सौंपते हुए की। पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के निर्देशन में थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ल ने सूचना पाते ही घटना स्थल पहुंच टीम जांच पड़ताल में जुट गई।
बस्ती। दुबौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम बेमहरी के खूनी टोला में हुए तांत्रिक हत्याकांड से पुलिस ने 17 दिन बाद पर्दा उठा दिया। पुलिस ने रविवार को मुठभेड़ में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक के पैर में गोली लगी है। जबकि दो अन्य आरोपी पकड़ से बाहर हैं। पुलिस का दावा है कि तांत्रिक रामजीत (58) की हत्या आशनाई में की गई थी। पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में पकड़ा गया आरोपी लवकुश उर्फ लालचंद ने पूछताछ में बताया कि तांत्रिक पहले उसकी बड़ी बहन पर गलत नजर रखता था। उसकी शादी के बाद छोटी बहन पर गलत नजर रखने लगा था।
कलेक्ट, विस्तारFollow Usअंधविश्वास की गिरफ्त में आकर धनवर्षा की उम्मीद में कछुओं से तांत्रिक क्रिया करने निकले 9 लोगों को लांजी वन विभाग ने दबोच लिया। टीम ने स्कॉर्पियो से दो जीवित कछुए बरामद किए, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है।
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गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
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