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💢वीआईपी इनाम💢मिहींपुरवा। सुजौली रेंज के कोलियागढ़ी बीट के नालों में रविवार रात कछुओं का शिकार करते हुए दो शातिरों को पकड़ा गया। इनमें से एक बिहार प्रांत का निवासी है। इनके पास से जिंदा संरक्षित प्रजाति के कछुए, नाव और शिकार में प्रयुक्त जाल तथा औजार बरामद हुए हैं।
️फ्रेंड्स डाउनलोड,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुरPublished by:अनूपपुर ब्यूरोUpdated Fri, 14 Nov 2025 07:27 AM IST
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैयाUpdated Sat, 10 Jan 2026 11:19 PM IST
वीआईपी स्टूडेंट, बालाघाट में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है।- फोटो : अमर उजाला
विस्तारFollow Usमातृत्व किसी भी महिला के जीवन का सबसे बड़ा सुख होता है। हालांकि गड़बड़ होती लाइफस्टाइल और खानपान से संबंधित दिक्कतों ने इस सुख से लाखों दंपत्तियों को वंचित रखा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में ऐसा ही एक मामला देखा गया है जहां दंपत्ति को इस सुख के लिए 12 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा। ये सुख मिला भी तो नवजात का जन्म समय पूर्व हुआ और उसे हार्ट से संबंधित समस्या भी थी। हालांकि डॉक्टर्स की टीम ने चिकित्सा कौशल की मिसाल पेश करते हुए न सिर्फ नवजात की जीवनरक्षक हृदय सर्जरी की बल्कि बच्ची को स्वस्थ करके छुट्टी दे दी।
बहराइच के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट मैच में बैटिंग करता खिलाड़ी। स्रोत : आयो
भाटापारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ब्लॉक सिमगा के ग्राम दरचुरा में एक बार फिर गौ माता के साथ अमानवीय अत्याचार का मामला सामने आया है। गांव के पास गौ माता के शव के टुकड़े मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई है।
कलेक्ट विथड्रॉ, संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्याUpdated Sun, 11 Jan 2026 08:36 PM IST
लाइक कृषि विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड मिला। सूचना विभाग
Civic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCबीवी ने मरवा डाला पतिRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest BengalयूपीBihar News
वीआईपी रजिस्टर, विस्तारFollow Us1 नवंबर 1983, यह वह ऐतिहासिक दिन था जब राजस्थान के दक्षिणी सिरे पर बसे जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले की तकदीर बदलनी शुरू हुई। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कागदी पिकअप वियर पर बटन दबाकर माही बांध की नहरों में जलप्रवाह शुरू किया, जिसने इस क्षेत्र के जीवन, भूमि और विकास की दिशा ही बदल दी। उस पल के साथ ही बांसवाड़ा का नाम ‘कालापानी’ से निकलकर ‘हराभरा जनपद’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।







