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💢वीआईपी बोनस💢घूसकांड में एसीबी ने एएसआई को किया गिरफ्तार- फोटो : अमर उजाला
️रजिस्टर टास्क,सारहमले में पुलिस की वर्दी फाड़ दी गई और शासकीय वाहन की चाबी छीनकर भागने की कोशिश की गई। पुलिस ने मुख्य आरोपियों शेरसिंह सिकलीगर और सरताज सिकलीगर को पकड़ लिया, जबकि उनके तीन साथी विरेन्द्र सिकलीगर, समशेरसिंह सिकलीगर और गुरुचरण सिकलीगर फरार हो गए।
अमर उजाला नेटवर्क, बलरामपुर रामानुजगंजPublished by:Digvijay SinghUpdated Fri, 09 Jan 2026 07:01 PM IST
कलेक्ट डिपॉजिट, मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत का आंकड़ा 16 तक पहुंच चुका है। छिंदवाड़ा जिले में 14 बच्चों की मौत के बाद अब बैतूल जिले के आमला ब्लॉक में दो मासूम बच्चों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में इन बच्चों की मौत का कारण भी किडनी फेल होना बताया जा रहा है। दोनों बच्चों का इलाज छिंदवाड़ा जिले के परासिया में ही डॉ. प्रवीण सोनी के पास हुआ था। परासिया में बच्चों की मौत के मामले में डॉ. सोनी को गिरफ्तार किया जा चुका है।
चरखी दादरी। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के दम पर यह संभव है। गांव खेड़ी बूरा की प्रिया लाखवान हिमाचल प्रदेश में न्यायिक अधिकारी बनकर युवाओं के लिए मिसाल बनी हैं। वहीं गांव इमलोटा के पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। गांव बलाली की कुश्ती खिलाड़ी नेहा सांगवान एशिया चैंपियनशिप और वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज में पदक जीतकर लगातार आगे बढ़ रही हैं। इनके साथ ही गांव घिकाड़ा के बॉक्सर नवीन झाझडिया ने विश्व मुक्केबाजी कप में कांस्य पदक जीतकर साबित किया कि सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। आज युवा दिवस पर जिले के ये युवा सबके लिए प्रेरणा हैं। इन सभी प्रतिभाओं का एक ही संदेश है कि लक्ष्य तय करें, तुलना से बचें और ईमानदारी से मेहनत करते रहें, सफलता जरूर मिलेगी।
सारमुंगेर जिले के वासुदेवपुर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश को लेकर दबंगों ने हथियार के बल पर तीन युवकों से मारपीट की। घटना में एक युवक का हाथ और पैर टूट गया, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। चलिए बता रहे हैं कि इस विवाद की वजह क्या थी?
चंपावत। कभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
ट्रांसफर डिपॉजिट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ाPublished by:प्रिया वर्माUpdated Thu, 23 Oct 2025 11:22 PM IST
सिल्वर डिपॉजिट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुरPublished by:बुरहानपुर ब्यूरोUpdated Wed, 23 Jul 2025 08:42 AM IST
ईज़ी अर्न, कमेंटकमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त







