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️बड़ा ईज़ी,दरियाबाद। स्थानीय ब्लॉक के रसूलपुर कला गांव की रिशा तुफैल दहेज के विरुद्ध मुहिम के साथ ही महिलाओं को हुनरमंद भी बना रही हैं। रिशा ने ‘दहेज पर प्रहार सोशल ट्रस्ट’ की सक्रिय सदस्य हैं। इस ट्रस्ट के जरिये रिशा दहेज रहित विवाह करने के लिए समाज के लोगों को जागरूक करती हैं। साथ ही महिलाओं को हुनरमंद बनाकर अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रेरित करती हैं। ताकि जब महिला स्वयं कमाने लायक होगी तो दहेज उसके विवाह में आड़े नहीं आएगा।
विस्तारFollow UsUP News:ब्रिटिश मौलाना से शिक्षण कार्य लेने और वेतन देने के मामले में मुबारकपुर कस्बे के जिस मदरसे की मान्यता निलंबित की गई है, उसमें 2678 छात्र- छात्राएं तालीम ले रहे हैं। मदरसा बोर्ड द्वारा मान्यता निलंबित होने से अब इन छात्रों का भविष्य अधर में हो गया है। इस संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने मदरसा बोर्ड को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा है।
प्लेटिनम वेरिफाई, वाल्टरगंज क्षेत्र में प्रधान पर गोली चलाने के आरोपी। स्रोत पुलिस
विस्तारFollow Usसूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के मुबारक अवसर पर आज बुधवार को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से दरगाह शरीफ में मखमली चादर और अकीदत के फूल पेश किए गए। इस अवसर पर दरगाह परिसर में आध्यात्मिक माहौल और अकीदतमंदों की मौजूदगी देखने को मिली।
कैश, आगर मालवा में स्थित बाबा बैजनाथ का मंदिर- फोटो : अमर उजाला
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विस्तारFollow Usमध्य प्रदेश के बालाघाट जिला में शनिवार देर रात नक्सल मोर्चे पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया। जिले के इतिहास में पहली बार एक साथ 10 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 77 लाख रुपये का इनामी नक्सली कबीर उर्फ महेंद्र भी शामिल है, जो कान्हा-भोरमदेव (केबी) डिवीजन का सक्रिय लीडर रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सभी नक्सलियों ने शनिवार रात करीब 10 बजे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। इसके तुरंत बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस लाइन बालाघाट लाया गया, जहां फिलहाल उनसे पूछताछ जारी है।
कमेंट, अरावली पर्वतशृंखला के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्या के आधार पर अपनाई जा रही 100 मीटर ऊंचाई संबंधी प्रशासनिक नीति पर पुनर्विचार की मांग की है। विधायक ने इसे केवल कानूनी व्याख्या का विषय नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरणीय भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बताया है।







