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💢अर्न क्लिक💢उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के मड़िहान थाना क्षेत्र के मड़िहान बाजार में मंगलवार की भोर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक सौतेले बेटे ने अपनी मां और भाई की निर्मम हत्या कर दी। आरोपी ने दोनों शवों को ट्रैक्टर ट्राली पर लादकर ठिकाने लगाने का प्रयास किया, लेकिन राहगीरों की सतर्कता से पूरी घटना का पर्दाफाश हो गया।
️ट्रांसफर विज़िट,राजस्थान की सतरंगी संस्कृति का अनोखा संगम इन दिनों बीकानेर में देखने को मिल रहा है। आज से इंटरनेशनल कैमल फेस्टिवल 2026 की भव्य शुरुआत हो गई है, जो 9 से 11 जनवरी तक तीन दिनों तक चलेगा। इस महोत्सव में ‘रेगिस्तान के जहाज’ कहे जाने वाले ऊंटों की शान के साथ-साथ राजस्थानी परंपराओं, लोक संस्कृति और रंग-बिरंगे आयोजनों की झलक देखने को मिल रही है। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस फेस्टिवल में सजे-धजे ऊंट, रौबीली मूंछों-दाढ़ियों वाले युवक और पारंपरिक वेशभूषा में महिलाएं विदेशी पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही हैं।
पॉइंट्स वीडियो, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सुशासन का मतलब केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि उसका असर आम लोगों के जीवन में और अधिकारियों के कामकाज में साफ नजर आना चाहिए। वे नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 समारोह को संबोधित कर रहे थे।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी/ सिवनीPublished by:प्रिया वर्माUpdated Mon, 22 Dec 2025 08:10 AM IST
चंडीगढ़। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों के साथ-साथ फौजियों द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में दी जा रही जानकारी के चलते अब युवा सेना के माध्यम से देश सेवा के लिए उमड़ने लगे हैं। चंडीगढ़ में एनडीए की तैयारी करवाने वाले इंस्टीट्यूट के रिटायर्ड फौजी अधिकारियों के अनुसार विदेशों से भारतीयों के डिपोर्ट होने जैसे मामलों ने भी युवाओं को सेना की ओर आकर्षित किया है।
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चंबा। वन मंडल चंबा में कशमल की जड़ों के दोहन को लेकर स्थानीय लोग व ठेकेदार आमने सामने हो गए हैं। अब तक ठेकेदार लोगों को दस रुपये प्रति किलो की दर से कशमल जड़ों का दाम दे रहे थे जबकि दवा कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग दाम बढ़ाने की मांग पर अड़ गए हैं। अब वे दस रुपये की जबह 18 रुपये प्रति किलो दाम देने की मांग कर रहे हैं। यह दाम चुकाने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हाे रहे हैं। इसके चलते कशमल दोहन क्षेत्र में थम गया है। हालांकि, कुछ इलाकों में लोग इसके दोहन का विरोध भी कर रहे हैं। कुछ मात्रा में उन्होंने उखाड़ी गई कशमल को जलाया भी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग अब दाम बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब लोगों व ठेकेदार के बीच में फंस गया है। विभाग चाहकर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विभाग के कर्मचारी सही तरीके से कशमल दोहन पर निगरानी रख सकते हैं। ये जड़ें स्थानीय लोग किस दाम पर बेच रहे हैं और ठेकेदार आगे किस दाम पर बेच रहा है, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है।
सर्वे कमेंट, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोलीUpdated Sun, 11 Jan 2026 04:23 PM IST







