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💢वीआईपी फ्रेंड्स💢विस्तारFollow Usमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झूठे वादों और खोखली बातों की राजनीति करने वालों को सत्ता से बाहर करना अब पंजाब के लोगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजनीति सत्ता सुख का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम होनी चाहिए, लेकिन पंजाब में मौजूदा सरकार ने इसे मजाक बना दिया है।
️कलेक्ट लाइक,अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:Digvijay SinghUpdated Thu, 18 Dec 2025 08:03 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:संदीप तिवारीUpdated Wed, 07 Jan 2026 07:38 AM IST
गेट, सारभागलपुर में एनटीपीसी कहलगांव में समर्थ मिशन के सहयोग से बायोमास को-फायरिंग पर क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कृषि अवशेषों से 28 गीगावॉट बिजली उत्पादन की संभावना, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि पर जोर दिया गया।
बैतूल के मुलताई का नाम अब मूलतापी होगा- फोटो : अमर उजाला
विस्तारFollow Usबिहार में ठंड बढ़ने लगी है। शनिवार सुबह पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, कोसी प्रमंडल के कई जिलों में उत्तर-पश्चिमी पछुआ हवाओं के तेज होने से कनकनी बढ़ गई है। रात के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है। शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक कई इलाकों में पारा नीचे लुढ़का है, जिससे सुबह-सुबह ठिठुरन बढ़ गई। इतना ही नहीं उत्तर और उत्तर-पूर्वी बिहार के जिलों में शनिवार की सुबह घने कोहरे की चादर छाई रही। पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, अररिया, किशनगंज और पूर्णिया में दृश्यता काफी कम हो गई। पूर्णिया में न्यूनतम दृश्यता 500 मीटर दर्ज की गई, जो राज्य में सबसे कम रही। कोहरे के कारण सड़क यातायात प्रभावित हुआ और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना पड़ा।
मासिक रजिस्टर, हरियाणा में सोमवार की सुबह शीत लहर से हुई। रविवार को जीटी रोड के जिलों, सोनीपत, नारनौल समेत अनेक स्थानों पर सुबह के समय कोहरा छाया रहा।
गोल्ड लॉग इन
अमर उजाला ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:50 AM IST
कम्पलीट, विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







