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💢साप्ताहिक ईज़ी💢बिजनौर। जिले के प्रभारी मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने शनिवार को महात्मा विदुर सभागार में पत्रकार वार्ता में वीबी जी राम जी की विशेषताओं का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि योजना में पहले 100 दिन रोजगार देने की गारंटी थी। अब पंजीकृत श्रमिक को 125 दिन रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। कहा कि सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए फसल कटाई, बुवाई के समय कुल मिलाकर 60 दिन कार्य बाधित रहेगा। इससे किसानों को श्रमिकों को लेकर परेशानी नहीं होगी। योजना के तहत अगर श्रमिकों को समयावधि में भुगतान नहीं होता है, तो उन्हें ब्याज के साथ मजदूरी की धनराशि दी जाएगी।
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विस्तारFollow Usछतरपुर जिला जेल में 22 वर्षीय आजीवन कारावास के कैदी ने जेल की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। मृतक कैदी शंकर प्रजापति को 376 पॉक्सो एक्ट के तहत घटना से महज 24 घंटे पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सजा से आहत होकर उसने यह खौफनाक कदम उठाया, जिससे जेल परिसर में हड़कंप मच गया।
वीडियो शेयर, सारमाओवादी विरोधी अभियान में शहीद आरक्षक दिनेश नाग की पत्नी पूजा नाग को पुलिस सैलरी पैकेज योजना के तहत 1.10 करोड़ रुपये का चेक सौंपा गया। पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में यह आर्थिक सहायता परिवार के लिए संबल और सम्मान का प्रतीक बनी।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:अर्पित याज्ञनिकUpdated Fri, 21 Nov 2025 08:36 PM IST
टास्क, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और सशस्त्र माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो माओवादियों के शव बरामद हुए हैं। यह घटना जिले के दक्षिणी क्षेत्र में हुई, जहां सुरक्षा बलों ने माओवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर एक सघन तलाशी अभियान शुरू किया था।
इंस्टेंट कैश नीतीश सरकार बिहार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉरलेंस की नीति अपनाने का दावा करती है। भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई भी होती है। अब घूससोर अफसरों और कर्मियों पर नकेल कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने खुद को स्मार्ट बनाने का फैसला लिया है। निगरानी की टीम अब अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी सेंटर बनाया जाएगा। निगरानी की टीम ने इस सेंटर के लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है।
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
रिवॉर्ड्स वीडियो, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ाPublished by:भीलवाड़ा ब्यूरोUpdated Sun, 12 Oct 2025 08:48 AM IST







