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💢ऑनलाइन💢आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब मंदिर के पंडितों ने सुसनेर एसडीएम सर्वेश यादव के विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया। पंडितों ने अनिश्चितकाल के लिए हवन और अनुष्ठान बंद कर मंदिर परिसर में ही धरना दे दिया है।
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विस्तारFollow Usबाड़मेर में राजकीय कन्या महाविद्यालय के बाहर शनिवार को फीस बढ़ोतरी के विरोध में छात्रों का धरना प्रदर्शन चल रहा था। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिए जाने के बाद यह प्रदर्शन शांत हो गया। इसी दौरान कॉलेज परिसर के पास एबीवीपी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को पुलिस गाड़ी में बैठाकर कोतवाली थाने ले आई, जिससे मामला अचानक तूल पकड़ गया।
सब्सक्राइब मोबाइल, सारअंडे की सब्जी बनाने को लेकर दंपती में कहासुनी हुई थी। जिसके बाद युवक ने मौत को गले लगा लिया। घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के शांतिनगर मोहल्ले की है।
बागपत जनपद में नैथला स्थित गौशाला में सोमवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब गौशाला खाली कराने पहुंचे ग्राम सचिव, बीडीओ भवर सिंह और ग्राम प्रधान की केयरटेकरों से तीखी नोकझोंक हो गई।
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुरPublished by:Digvijay SinghUpdated Tue, 18 Nov 2025 06:28 PM IST
इंस्टेंट, सारबागेश्वर के दाड़िमठौक गांव में घर के भीतर अंगीठी से निकली गैस के कारण एक ही परिवार के चार सदस्य बेहोश हो गए। प्रभावितों में बच्ची भी शामिल है।
मासिक विथड्रॉ कमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
सारभाटापारा में अवैध धान खपाने की कोशिश पर प्रशासन ने तीन जगह संयुक्त छापेमारी कर 1044.40 क्विंटल धान जब्त किया। वैध दस्तावेज न मिलने पर कार्रवाई की गई और अधिकारियों ने आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही।
अतिरिक्त ऑफर, अमरकंटक के जंगलों में साल के पेड़ गंभीर साल बोरर कीट से ग्रसित पाए गए हैं। साल बोरर कीट एक विनाशकारी कीट है, जो मुख्य रूप से साल के पेड़ों को नुकसान पहुंचाता है, उन्हें खोखला कर देता है। यह कीट साल के पेड़ों के लिए सबसे खतरनाक कीटों में से एक है और यह खड़े पेड़ और ताजी कटी हुई लकड़ी दोनों को प्रभावित करता है। बीते कई महीनों से अमरकंटक के जंगलों में साल बोरर कीड़े का प्रकोप फैला हुआ है। जिसके कारण अमरकंटक के जंगल में स्थित 10 हजार से अधिक साल के पेड़ इससे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।







