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💢कम्पलीट मोबाइल💢बागपत/ खेकड़ा। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर पुलिस ने रविवार को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर डॉली शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
️वेरिफाई डाउनलोड,विस्तारFollow Usभाटापारा में बुधवार से छत्तीसगढ़ की राजधानी में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच को लेकर पूरे प्रदेश में हलचल तेज है। इसी बीच भाटापारा, जिसे मिनी बॉम्बे और सट्टे के गढ़ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से शहर के नामचिन और रसूखदार सटोरिए भुमिगत हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे दूसरे शहरों से अब भी अपने सट्टे के कारोबार को संचालित कर रहे हैं।
अयोध्या। श्रीराम मंदिर के साथ अब राम ध्वज भी आस्था और पहचान का नया प्रतीक बनता जा रहा है। रामलला के दर्शन के बाद श्रद्धालु अपने साथ राम ध्वज ले जाना आस्था की पूर्णता मान रहे हैं। यही वजह है कि राम ध्वज अब सिर्फ एक धार्मिक ध्वज नहीं, बल्कि आस्था का ब्रांड बन चुका है। दुकानदारों के अनुसार रोजाना पांच हजार से अधिक राम ध्वज की बिक्री हो रही है।
वीआईपी डाउनलोड, बलिया। रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से अपने घर या रिश्तेदार के पास जाने के लिए ऑटो या ई-रिक्शा में सफर करते हैं तो पहले अपनी जेब में हाथ डाल लिजिए। क्योंकि रात होते ही यहां पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमानी भरा किराया वसूलते हैं।
बागेश्वर। मनकोट गांव की बुजुर्ग महिला की मौत को लेकर बने रहस्य से अब पर्दा उठ गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद वन विभाग ने पुष्टि की है कि महिला की मौत वन्यजीव के हमले के कारण ही हुई थी। इस खुलासे के बाद वन विभाग ने पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा राशि देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
विस्तारFollow Usमहाकुंभ की तरह माघ मेला श्रद्धा के साथ ही व्यापार का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। संगम तट पर लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि इससे स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक संबल मिलता है।
ऐप इनवाइट, औरैया। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद भले ही प्रशासन अलर्ट मोड में होने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारांPublished by:बारां ब्यूरोUpdated Fri, 19 Dec 2025 01:24 PM IST
छोटा इंस्टेंट, अमेठी सिटी। शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर परिश्रम, अनुशासन और नवाचार से पहचान बनाना आसान नहीं होता। इस कठिन राह पर चलते हुए अर्चना मौर्या ने संघर्ष को अपनी शक्ति बनाया और सफलता का मुकाम हासिल किया। वर्ष 2009 में सीतापुर में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के साथ उनका शैक्षिक सफर शुरू हुआ। वर्ष 2012 में जनपद अमेठी में स्थानांतरण के बाद उन्होंने बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया।







