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💢कूपन डाउनलोड💢सारपुलिस ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, जीतू पटवारी और अन्य नेताओं के काफिले को कई जगह रोका। सत्याग्रह के अंत में मंच से पटवारी समेत सभी को गिरफ्तार करने की घोषणा की गई, लेकिन तत्काल रिहा भी कर दिया गया। यह विरोध अशोकनगर निवासी गजराज लोधी प्रकरण को लेकर हो रहा है, जिसमें जीतू पटवारी पर बहकाने का आरोप लगाकर FIR दर्ज की गई थी।
️मोबाइल,इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने एसआईआर पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि 24 प्रतिशत मतदाताओं का नाम प्रयागराज में कट जाना चिंता की बात है। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए उनके ज्यादा लोगों जोड़ा जा रहा है। विपक्ष के लोगों का नाम न जोड़े जाने की साजिश और षड़यंत्र की बू आ रही है। एसआईआर में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। सरकार के इशारे पर कार्य किया जा रहा है। शीतकालीन सत्र में चर्चा हुई लेकिन सरकार ने जब नहीं दिया। विश्वास लोकतंत्र की नींव को मजबूती देता है, लेकिन जनता का विश्वास डगमगा रहा है तो यह चिंता की बात है।
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संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठीUpdated Sun, 11 Jan 2026 12:43 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 11:30 PM IST
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स्टूडेंट रिवॉर्ड्स विस्तारFollow Usप्रदेश के वागड़ क्षेत्र में अनेक प्राचीन स्थल हैं, जो श्रद्धा, संस्कृति और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है मानगढ़ धाम, जिसे आदिवासी समाज अपनी आस्था और शौर्य का पावन प्रतीक मानता है। यह स्थान केवल धार्मिक भावना से ही नहीं, बल्कि आदिवासियों की अमर शहादत की स्मृतियों से भी भरा हुआ है।
विस्तारFollow Usसरगुजा लोकसभा क्षेत्र में आयोजित सांसद खेल महोत्सव में अंबिकापुर के स्थानीय विधायक एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने युवाओं और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की बात कही। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देशभर में सांसद खेल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, ताकि युवा शक्ति को बढ़ावा मिल सके और ग्रामीण अंचलों की छिपी प्रतिभाएं सामने आ सकें।
टास्क, विस्तारFollow Usप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।







