लाइक इंस्टेंट
कमाई कमाई
डायमंड इनवाइट, Inc
मासिक विन
💢टास्क💢
️ट्रांसफर लाइक,
खुर्जा जंक्शन। सरकार धर्म और जाति के नाम पर बांटने का काम कर रही है, जो हमको नहीं चाहिए। वर्तमान की राजनीति धर्मवाद, जातिवाद और भाषा वाद में चल रही है। इसे खत्म करना चाहिए। यह बातें खुर्जा जंक्शन के कलंदरगढ़ी गांव में सामूहिक विवाह सम्मेलन में पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहीं।
टास्क लॉग इन, Budget 2026खुदरा महंगाई दर में उछालShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'डिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढाIND vs NZसीएम रेखा का बयानअंबरनाथ नगर परिषदIndia-US Tiesपीएम मोदी कार डिप्लोमेसी
सारअबोहर में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान लवप्रीत (28) निवासी राजपुरा (पटियाला) के रूप में हुई है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की पहल पर देश में पहली बार 200 किमी लंबी 'वेदांता टूर डी थार' अंतर्राष्ट्रीय साइक्लिंग रेस का आयोजन बीकानेर में किया गया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार सुबह 08.15 बजे नौरंगदेसर में साइक्लिंग रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, खाजूवाला विधायक डॉ विश्वनाथ मेघवाल, डूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत, लालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विमर्शानंद, फ्रांस से आए पीयर गिरबॉड सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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मेगा सर्वे, विस्तारFollow Usभीलवाड़ा जिले के करेड़ा थाना क्षेत्र के नागा का बाड़िया गांव में बीती रात एक दिल दहला देने वाली पारिवारिक वारदात सामने आई। यहां एक पोते ने अपने ही दादा की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। घटना इतनी भयावह थी कि गांव में दहशत और तनाव का माहौल पैदा हो गया। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर करेड़ा चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया है। मृतक की पहचान मोहनलाल बागरिया के रूप में हुई है।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त और आयुक्त की नियुक्ति के मापदंड को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच ने याचिका खारिज करने के साथ ही नियुक्ति पर लगी रोक भी हटा दी।
क्लिक सर्वे, विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







