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💢ऑफर लाइक💢जिले के दबोह क्षेत्र में पुरानी रंजिश ने खौफनाक रूप ले लिया। रायपुरा गांव में दो पक्षों के बीच विवाद के दौरान पांच लोगों ने मिलकर अली उर्फ रुद्रप्रताप सिंह जाटव पर लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक का मामा भी गंभीर रूप से घायल हुआ और उसे इलाज के लिए ग्वालियर भेजा गया।
️अतिरिक्त वॉच,सारपरिवारों ने बताया कि उनके बच्चों निहाल धुर्वे (2 वर्ष) और कबीर यादव (3 वर्ष 11 माह) का इलाज परासिया के एक निजी चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी से कराया गया था। सिरप के सेवन के बाद बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, लेकिन दोनों की जान नहीं बचाई जा सकी।
सारबुरहानपुर में ईद-उल-अजहा के दिन एक बहुत ही खास नज़ारा देखने को मिला। यहां एक लाख से ज़्यादा मुस्लिम लोगों ने मिलकर नमाज़ पढ़ी। शाही ईदगाह से लेकर आसपास की सड़कों तक लोग सिर झुकाकर दुआ मांगते नजर आए। पूरे शहर का माहौल दुआओं और अमन-शांति की कामनाओं से भर गया।
रिवॉर्ड्स, विस्तारFollow Usभिंड जिले के सुरपुरा में दलित युवक ज्ञान सिंह जाटव के साथ मारपीट, बंधक बनाकर पेशाब पिलाने और रुपए लूटने के आरोपों के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।इस घटना को लेकर दलित संगठनों में भारी आक्रोश है। बुधवार को भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित से मुलाकात की। वहीं, भीम आर्मी ने प्रशासन को 6 दिन के भीतर सख्त कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया है।
दीपावली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा के अवसर पर बैतूल में हर साल एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां के कई परिवार अपने छोटे बच्चों को गोबर से बने गोवर्धन पर लिटाते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि ऐसा करने से बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और वे सालभर निरोगी बने रहते हैं।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांकाPublished by:भागलपुर ब्यूरोUpdated Sat, 27 Dec 2025 08:33 AM IST
कमाई पैसे,
सर्वे रिवॉर्ड्स अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:Digvijay SinghUpdated Thu, 25 Dec 2025 07:47 PM IST
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
बड़ा कलेक्ट,







