वॉच ऑनलाइन
मोबाइल सब्सक्राइब
लाइक स्टूडेंट, Inc
शेयर विज़िट
💢इनाम विथड्रॉ💢विस्तारFollow Usमकर संक्रांति पर संगम तट पर 15 जनवरी को आस्था का भव्य नजारा देखने को मिलेगा। मेला प्रशासन ने इस मौके पर दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम स्नान के अनुमान को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। अरैल, झूंसी, संगम क्षेत्र में करीब 24 घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु जिस तरफ से आएंगे, उसी के नजदीक घाट पर स्नान कराने की तैयारी की जा रही है। 2024 में मकर संक्रांति पर करीब 29 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया था। इस बार भीड़ को देखते हुए स्नान घाटों की लंबाई बढ़ाकर 3.69 किमी कर दी गई है। पिछली बार यह लंबाई केवल दो किमी ही थी। मेला क्षेत्र में 106.24 किमी लंबाई में चकर्ड प्लेट से सड़कें तैयार की गई हैं। तीर्थ पुरोहितों, आचार्यबाड़ा, दंडीबाड़ा, खाक चौक सहित प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर सज चुके हैं।
️इनाम ऑनलाइन,हल्द्वानी ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 11:22 PM IST
विस्तारFollow Usमकर संक्रांति का पर्व, जो पारंपरिक रूप से खिचड़ी के बिना अधूरा सा लगता है, इस वर्ष एक विशेष संयोग के कारण अपने पारंपरिक स्वरूप में नहीं मनाया जा सकेगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी का भी पर्व पड़ रहा है, जो 19 वर्षों बाद ऐसा संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल से बनी किसी भी सामग्री का सेवन वर्जित होता है।
वीआईपी शेयर, संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगरUpdated Sat, 10 Jan 2026 11:25 PM IST
अमर उजाला नेटवर्क, बाराबंकीPublished by:ishwar ashishUpdated Sun, 11 Jan 2026 04:50 PM IST
इंदिरा गांधी स्टेडियम में रविवार को क्रिकेट टूर्नामेंट में बैटिंग करता खिलाड़ी। -संवाद
निर्वस्त्र होकर प्रदर्शन करता पीड़ित कर्मचारी- फोटो : अमर उजाला
डिपॉजिट वीडियो,
इनवाइट कैश संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराजUpdated Tue, 13 Jan 2026 02:37 AM IST
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फरसाबहार को दी 40.89 करोड़ की विकास सौगात- फोटो : अमर उजाला
वॉच कूपन, विस्तारFollow Usजिले के मुंगावली, बहादुरपुर और आसपास के क्षेत्रों के 36 बंधक मजदूरों को महाराष्ट्र से मुक्त करा लिया गया है। स्थानीय पुलिस महाराष्ट्र पहुंचकर स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इन सभी मजदूरों को वापस लेकर आई। ये मजदूर महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के बासी थाना क्षेत्र के गिरोली गांव में बंधक बनाए गए थे। वहां उन्हें न तो मजदूरी का भुगतान किया जा रहा था और न ही उन्हें अपने घर लौटने दिया जा रहा था। उन्हें अपने परिजनों से भी बात करने की अनुमति नहीं थी।







