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💢टास्क विज़िट💢सारभाटापारा शहर और ग्रामीण क्षेत्र में अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण अवैध शराब कारोबार बनता जा रहा है।
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बस्ती। दुबौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम बेमहरी के खूनी टोला में हुए तांत्रिक हत्याकांड से पुलिस ने 17 दिन बाद पर्दा उठा दिया। पुलिस ने रविवार को मुठभेड़ में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक के पैर में गोली लगी है। जबकि दो अन्य आरोपी पकड़ से बाहर हैं। पुलिस का दावा है कि तांत्रिक रामजीत (58) की हत्या आशनाई में की गई थी। पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में पकड़ा गया आरोपी लवकुश उर्फ लालचंद ने पूछताछ में बताया कि तांत्रिक पहले उसकी बड़ी बहन पर गलत नजर रखता था। उसकी शादी के बाद छोटी बहन पर गलत नजर रखने लगा था।
पॉइंट्स ईज़ी, संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइचUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानीPublished by:बड़वानी ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 10:17 AM IST
पिपरहवा चौराहा। तुलसीपुर-हरैया मार्ग पर खैरी भट्टा के पास ट्रक को ओवरटेक करने के चक्कर में शनिवार शाम करीब 5:30 बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई। हादसे में तुलसीपुर क्षेत्र के ग्राम कल्यानपुर निवासी सुरेश कुमार वर्मा (32) की मौत हो गई। हादसे में गांव के ही ट्रैक्टर चालक रामसेवक गंभीर रूप से घायल हो गए। रामसेवक को सीएचसी तुलसीपुर में भर्ती कराया गया है।
भैसाही में आयोजित प्रशिक्षण में जानकारी देते प्रशिक्षक। स्रोत : आयोजक
कमाई कम्पलीट, विस्तारFollow Usतीन दशकों तक जंगलों में दहशत फैलाने वाले माओवादी संगठन का बालाघाट जिले से पूर्ण सफाया हो गया है। गुरुवार को जिले में सक्रिय बचे हुए दो हार्डकोर माओवादी दीपक उर्फ सुधाकर उर्फ मंगल उइके और उसके साथी रोहित (एसीएम, दर्रेकसा एरिया कमेटी) ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया। एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद जिले में कोई हार्डकोर नक्सली नहीं रह गया है।
इंस्टेंट ऑफर सारभाटापारा में अमित बघेल के विवादित बयान के बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया है। बुधवार को सिंधी समाज और अग्रवाल समाज के सैकड़ों लोगों ने शहर थाना पहुंचकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
अमर उजाला नेटवर्क, भाटापाराPublished by:Digvijay SinghUpdated Wed, 29 Oct 2025 12:51 PM IST
रिसीव कमाई, महाकुंभ की तरह माघ मेला श्रद्धा के साथ ही व्यापार का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। संगम तट पर लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि इससे स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक संबल मिलता है।







