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💢रिवॉर्ड्स💢सारकिरनापुर विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मेंढरा में बच्चों को केले के पत्तों में मध्यान्ह भोजन परोसने के मामले में कलेक्टर ने प्रभारी प्रधानपाठक को गंभीर लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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विस्तारFollow Usगुजरात में शराब बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद वहां चोरी-छिपे अवैध शराब की सप्लाई लगातार जारी है। तस्कर इस काम के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र में सामने आया, जहां पुलिस ने सेनेटरी नैपकिन के कार्टनों की आड़ में तस्करी कर ले जाई जा रही 50 कार्टन अवैध शराब जब्त की। इस कार्रवाई में एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। जब्त शराब की कीमत करीब 5 लाख 25 हजार रुपए आंकी गई है।
गोल्ड अर्न, विस्तारFollow Usएकीकृत शासकीय माध्यमिक शाला पांडुपिपरिया में शुक्रवार दोपहर हंगामा मचा रहा। कक्षा 7वीं और 8वीं में पढ़ने वाली छात्राओं ने प्राचार्य कोमल प्रसाद कोरी पर अशोभनीय व्यवहार और अपशब्दों के आरोप लगाए। छात्राओं का आरोप है कि प्राचार्य द्वारा उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है और शौचालय जाने तक पर नजर रखी जाती है। इतना ही नहीं, स्कूल में भोजन बनाने आने वाली महिलाओं से भी प्राचार्य अश्लील टिप्पणी करते हैं।
धूप निकलने के बाद जवाहर पार्क में झूलों पर मस्ती करते बच्चे- फोटो : संवाद
तस्करी करके ले जाई जा रही शराब के साथ ड्राइवर गिरफ्तार
गेम कमाई, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
वॉच न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतराPublished by:बालोतरा ब्यूरोUpdated Mon, 22 Dec 2025 08:53 PM IST
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
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