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️साप्ताहिक वीडियो,विस्तारFollow Usआज भी गांव-कस्बों के लोग सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और जब कभी सरकारी इंजीनियर या ठेकेदार विकास का चोला ओढ़कर गांव पहुंचते हैं तो वहां भी लूट-खसोट का खेल शुरू हो जाता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला बालोतरा जिले में सामने आया है, जहां ग्रामीणों का वर्षों का इंतजार एक रात की हेराफेरी में बदल गया।
नया डिपॉजिट,
विस्तारFollow Usलोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए वागड़ के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा से मुलाकात की है। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या मालवीया कांग्रेस में घर वापसी करेंगे। यदि ऐसा होता है, तो यह भाजपा के लिए भी बड़ा झटका हो सकता है।
लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपतPublished by:डिंपल सिरोहीUpdated Mon, 12 Jan 2026 03:37 PM IST
सर्वे, विस्तारFollow Usरूपझर थाना क्षेत्र के कटेझिरिया जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। तलाशी अभियान के दौरान खून से सने जूते और नक्सलियों का पिट्ठू बैग मिला है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि मुठभेड़ में कोई नक्सली मारा गया या गंभीर रूप से घायल हुआ है। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि 2-3 नवंबर की रात माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर हॉकफोर्स, सीआरपीएफ, कोबरा और थाना पुलिस की संयुक्त टीम सर्चिंग के लिए जंगल में गई थी। इसी दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में सुरक्षाबलों ने भी आत्मरक्षा में गोलीबारी की।
मासिक कमाई विस्तारFollow Usसरगुजा जिला के अंबिकापुर में ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम ने बुधवार की सुबह अंबिकापुर नगर के 4 चार आर आई के घरों पर छापेमार कारवाई की है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में आर आई भर्ती में पेपर लीक हुआ था,जिसमें एफ आई आई दर्ज किया गया था। इसी मामले में जांच करने ईओडब्ल्यू और एसीबी की टीम संपत्ति के साथ संदिग्ध लेन-देन एवं पेपर लीक से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
बारां के केलवाड़ा कस्बे की निकटवर्ती ग्राम पंचायत दांता में विधायक कोष से बने हाट बाजार में धांधली और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार द्वारा बनाए गए चबूतरों को पूरी तरह नकार दिया है। 10 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत होने के बावजूद भी मौके पर कोई नया ठोस निर्माण नहीं हुआ। महज पूर्व में बने चबूतरों की मरम्मत कर खानापूर्ति कर दी गई।
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