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💢साप्ताहिक लॉग इन💢विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
️विन,कमेंटकमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
वेरिफाई टास्क, विस्तारFollow Usपूर्णिया में 24 वर्षीय युवती के साथ हुई दरिंदगी के मामले में पूर्णिया पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य आरोपी मोहम्मद जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में शामिल अन्य पांच आरोपियों की तलाश के लिए छापामारी तेज कर दी गई है। इस बीच, पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए जीएमसीएच (GMCH) भेजा गया, जहां उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटनाPublished by:आदित्य आनंदUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:01 AM IST
खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2025- फोटो : अमर उजाला
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विशेष डिपॉजिट, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल सुरक्षा, जल संरक्षण और आमजन को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 10 जनवरी 2026 से प्रदेशव्यापी “स्वच्छ जल अभियान” का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने यह अभियान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लॉन्च किया। इस अवसर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल भी उपस्थित रहे। वीसी में प्रदेश के सभी महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, कमिश्नर, कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ, अधिकारी तथा नगरीय-ग्रामीण जनप्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि घर-घर तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचे। किसी भी स्थिति में दूषित पानी की आपूर्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अतिरिक्त वीडियो झंडूता के बलघाड़ में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मौजूद लोग। स्रोत: आयोजक
पैसे, छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव 'बस्तर पंडुम' इस वर्ष 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है।







