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️कमाई सब्सक्राइब,भारत से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के जत्थे के साथ पाकिस्तान में स्थित गुरुधामों के दर्शन के लिए गई कपूरथला जिले की रहने वाली सरबजीत कौर की भारत वापसी फिलहाल टल गई है। सीमा पार से मिली जानकारी के अनूसार पाकिस्तान ने सरबजीत कौर को भारत भेजने की बजाय उसकी वीजा अवधि बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस्लाम धर्म कबूल करने के बाद सरबजीत कौर अब नूर फातिमा हुसैन के नाम से जानी जा रही है।
सारभाटापारा में अवैध धान खपाने की कोशिश पर प्रशासन ने तीन जगह संयुक्त छापेमारी कर 1044.40 क्विंटल धान जब्त किया। वैध दस्तावेज न मिलने पर कार्रवाई की गई और अधिकारियों ने आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रखने की बात कही।
डिपॉजिट ऑफर, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:संदीप तिवारीUpdated Tue, 06 Jan 2026 07:41 AM IST
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर नगर पालिका परिषद ने शहरवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान के पास सुविधाओं से युक्त नवनिर्मित बच्चा पार्क का विधिवत लोकार्पण किया गया। 22 लाख रुपये की लागत से तैयार यह पार्क अब बच्चों की सेहत और मनोरंजन का नया केंद्र बनेगा।
सिकंदरपुर क्षेत्र के महुलानपार गांव में सुभासपा के जन चौपाल को संबोधित करते राष्ट्रीय प्रवक्ता
विथड्रॉ मोबाइल, संवाद न्यूज एजेंसी, बांदाUpdated Sat, 10 Jan 2026 11:37 PM IST
इनवाइट कमेंट बाह। जैतपुर के चौरंगाबीहड़ गांव में खुरपका, मुंहपका की चपेट में आने से रीमा देवी एवं फूलमती की कई बकरियां बीमार हो गई हैं। एक बकरी मर भी गई थी। बकरियां चारा खा पा रही थी और न ही चल पा रही थी। सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम चौरंगाबीहड़ गांव पहुंची। बीमार बकरियों का इलाज किया। बकरियां बांधे जाने वाले परिसर की सफाई रखने के लिए पशुपालकों को जागरूक किया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवांगी उदैनिया ने बताया कि सोमवार को विभाग की टीम ने बीमार बकरियों का उपचार किया है। बचाव के लिए पशुपालकों को प्रेरित किया है।
पुराना इनाम, विस्तारFollow Usबारां के केलवाड़ा कस्बे की निकटवर्ती ग्राम पंचायत दांता में विधायक कोष से बने हाट बाजार में धांधली और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार द्वारा बनाए गए चबूतरों को पूरी तरह नकार दिया है। 10 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत होने के बावजूद भी मौके पर कोई नया ठोस निर्माण नहीं हुआ। महज पूर्व में बने चबूतरों की मरम्मत कर खानापूर्ति कर दी गई।







