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💢दैनिक ट्रांसफर💢अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Mon, 05 Jan 2026 05:22 PM IST
️कूपन,
सिल्वर कूपन, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में 15 जनवरी से एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर मध्यप्रदेश के मौसम पर भी साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस सिस्टम के प्रभाव से 2 से 3 दिन बाद प्रदेश के उत्तरी इलाकों में मावठा गिर सकता है। फिलहाल ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग में घना ठंडा मौसम बना हुआ है। मंगलवार सुबह प्रदेश के कई जिलों में कोहरे की चादर छाई रही। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया। राजधानी भोपाल और इंदौर समेत उज्जैन, खजुराहो, गुना, शिवपुरी, शाजापुर और सीहोर में भी कोहरे का असर देखा गया। हालांकि, अधिकतर इलाकों में दृश्यता 1 से 2 किलोमीटर तक बनी रही।
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पोखरी (चमोली)। भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता मयंक पंत ने पोखरी क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने इन समस्याओं के त्वरित निस्तारण की मांग की। उन्होंने रुद्रप्रयाग-पोखरी-गोपेश्वर सड़क के 59 से 88 किमी तक अपग्रेडेशन के शासन में लंबित प्रस्ताव को स्वीकृत कराने की मांग की। मिनी स्टेडियम विनायकधार में निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी। उन्होंने घोषणा के तहत धनराशि दिलाने की मांग की। इसके अलावा पोखरी में पार्किंग निर्माण कार्य शुरू करवाने, सीएचसी में सर्जन व रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती, अटल उत्कृष्ट विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज पोखरी के लिए बस सेवा संचालित कराने की मांग की। संवाद
सारWeather News: मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील करते हुए कहा कि वाहन चालकों को धीमी गति से चलने, फॉग लाइट का उपयोग करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
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बोनस ऑनलाइन विस्तारFollow Usभोपाल के पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय ने किडनी स्टोन (पथरी) के इलाज को लेकर बड़ा दावा किया है। महाविद्यालय में किए गए 90 दिन के शोध में सामने आया है कि आयुर्वेदिक काढ़े के नियमित सेवन से 73 प्रतिशत मरीजों को बिना ऑपरेशन और बिना लेजर इलाज के राहत मिली है। शोध के दौरान कई मरीजों में पथरी का आकार धीरे-धीरे कम हुआ, जबकि कुछ मामलों में पथरी पूरी तरह शरीर से बाहर निकल गई। यह शोध किडनी स्टोन से पीड़ित उन मरीजों पर किया गया, जो लंबे समय से दर्द, जलन और पेशाब संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। शोध के दौरान मरीजों को विशेष आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार काढ़ा दिया गया। इसके साथ ही खानपान, जीवनशैली और पानी पीने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए। उपचार शुरू होने के कुछ ही हफ्तों में अधिकांश मरीजों को दर्द से राहत मिलने लगी और पथरी से जुड़ी परेशानियां कम होती चली गईं।
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