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💢सब्सक्राइब कैश💢विस्तारFollow Usसूरजपुर जिले के रामानुजनगर में एक प्राइवेट स्कूल में केजी-टू के छात्र को होमवर्क नहीं करने पर टीचर ने घंटों पेड़ से लटकाए रखा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पेरेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में परिजनों ने स्कूल के बाहर हंगामा कर दिया।
️विशेष फ्रेंड्स,उझानी। नगर पालिका परिषद के परिसर में अब पालिकाध्यक्ष का भी दफ्तर होगा। इसके लिए चार माह पहले निर्माण कार्य शुरू हुआ, जो अब 80 फीसदी तक पूरा हो चुका है। दफ्तर में अध्यक्ष के अलावा सदस्यों के बैठने की सुविधा के साथ ही आगंतुक कक्ष भी होगा।
बिजनौर/बेगावाला। रावली स्थित गोशाला में संरक्षित पशुओं की दुर्दशा हो रही है। भीषण ठंड में पशुओं को सर्दी से बचाव के इंतजाम नहीं मिले। वहीं दो पशुओं के शव और दो के कंकाल खुले में पड़े देख बजरंग दल के पदाधिकारियों ने मौके पर हंगामा किया। साथ ही पशुओं की हड्डियां भी गोशाला परिसर में इधर-उधर पड़ी मिली। हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे एडीओ ने जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर शवों को जमीन में दबाया।
साप्ताहिक मोबाइल, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियालाPublished by:अंकेश ठाकुरUpdated Mon, 12 Jan 2026 03:54 PM IST
वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:34 AM IST
वेरिफाई इनाम, अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Sun, 11 Jan 2026 06:33 PM IST
वीआईपी फ्री विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
सारमामले में मृतक के परिजनों ने संदिग्ध मौत की आशंका जताते हुए कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस और एफएसएल टीम ने मौके पर जांच की है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस उसके हालिया व्यवहार और परिस्थितियों की जानकारी जुटा रही है।
ऑनलाइन वीडियो, छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव 'बस्तर पंडुम' इस वर्ष 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है।







