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️नया गेट,सारकानपुर नगर के सीसामऊ से सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी की गैंगस्टर के तहत दर्ज मुकदमे की कार्रवाई रद्द करने की मांग में दायर अर्जी पर बहस पूरी हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है।
जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने नई दिल्ली में केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस.जयशंकर से मुलाकात कर बालोतरा जिले के सोहड़ा गांव निवासी 19 वर्षीय युवक रमेश मेघवाल की कतर में हुई संदिग्ध मौत के मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की।
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सारहटरी बाजार भाटापारा में 13 नवंबर 2025 की रात लगभग 9 बजे एक व्यक्ति द्वारा बछड़े को चाकू से घायल कर दिया गया। सूचना मिलते ही गौसेवकों की मदद से बछड़े का प्राथमिक उपचार कराया गया और उसे सुरक्षित रूप से गौशाला में शिफ्ट किया गया।
विस्तारFollow Usराज्य सरकार ने जिलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत बालोतरा और बाड़मेर जिलों की सीमाओं में आंशिक बदलाव किया है। इस नए आदेश की अधिसूचना शुक्रवार देर रात सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर आदेश वायरल होते ही दोनों जिलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कहीं लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया तो कहीं असंतोष और नाराजगी भी दिखाई दी।
शेयर, संवाद न्यूज एजेंसी, औरैयाUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:37 PM IST
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गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
सुपर कूपन, अयाना। ग्राम पंचायत ऐमा सेंगनपुर के किसानों ने अन्ना गोवंशों से अपनी गेहूं की फसल बचाने के लिए अनोखा कदम उठाया। कई शिकायतों के बाद भी सुनवाई न होने से परेशान किसानों ने चंदा जमाकर अन्ना गोवंशों को पकड़कर गोशाला भेजने की व्यवस्था की। किसानों ने पहले गोवंश एक खाली प्लॉट में एकत्र किए फिर वाहनों से उन्हें गोशाला भिजवा दिया।







