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💢ईज़ी💢विस्तारFollow Usसरगुजा जिला के अमेरा कोल खदान के विस्तार को लेकर ग्रामीण उग्र हो गए हैं, सैकड़ों ग्रामीणों ने लाठी डंडे गुलेल और कुल्हाड़ी से लैस होकर पुलिस बल पर हमला कर दिया।ग्रामीणों ने पथराव भी किया जिसमें 40 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। जवाबी कार्रवाई में आंदोलनरत लगभग एक दर्जन ग्रामीण घायल हुए हैं।
️प्लेटिनम विज़िट,संवाद न्यूज एजेंसी, अंबालाUpdated Mon, 12 Jan 2026 02:00 AM IST
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराजPublished by:विनोद सिंहUpdated Mon, 12 Jan 2026 04:04 PM IST
डाउनलोड, विस्तारFollow Usइलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने एसआईआर पर सवाल खड़े किए हैं। कहा कि 24 प्रतिशत मतदाताओं का नाम प्रयागराज में कट जाना चिंता की बात है। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए उनके ज्यादा लोगों जोड़ा जा रहा है। विपक्ष के लोगों का नाम न जोड़े जाने की साजिश और षड़यंत्र की बू आ रही है। एसआईआर में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। सरकार के इशारे पर कार्य किया जा रहा है। शीतकालीन सत्र में चर्चा हुई लेकिन सरकार ने जब नहीं दिया। विश्वास लोकतंत्र की नींव को मजबूती देता है, लेकिन जनता का विश्वास डगमगा रहा है तो यह चिंता की बात है।
जहांगीरगंज। कस्बे में एक प्रेम कहानी परवान चढ़ गई। पुलिस के हस्तक्षेप और समझाने के बाद परिजनों की सहमति से एक युवक और युवती ने सोमवार को एक मंदिर में सात फेरे लेकर एक-दूसरे को अपना लिया। यह प्रेम विवाह इसलिए खास रहा क्योंकि दोनों के परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे, जिसके बाद प्रेमिका की ओर से थाने में गुहार लगाई गई।
ठाकुर बलवंत सिंह की भव्य प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में शामिल होंगे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह- फोटो : अमर उजाला
पैसे डिपॉजिट, वाराणसी ब्यूरोUpdated Mon, 05 Jan 2026 10:50 PM IST
टास्क रजिस्टर आज भी गांव-कस्बों के लोग सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और जब कभी सरकारी इंजीनियर या ठेकेदार विकास का चोला ओढ़कर गांव पहुंचते हैं तो वहां भी लूट-खसोट का खेल शुरू हो जाता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला बालोतरा जिले में सामने आया है, जहां ग्रामीणों का वर्षों का इंतजार एक रात की हेराफेरी में बदल गया।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
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