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💢पॉइंट्स💢विस्तारFollow Usमुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि झूठे वादों और खोखली बातों की राजनीति करने वालों को सत्ता से बाहर करना अब पंजाब के लोगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजनीति सत्ता सुख का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम होनी चाहिए, लेकिन पंजाब में मौजूदा सरकार ने इसे मजाक बना दिया है।
️प्रीमियम वीडियो,सारमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सुशासन का मतलब केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि उसका असर आम लोगों के जीवन में और अधिकारियों के कामकाज में साफ नजर आना चाहिए।
विस्तारFollow Usपूर्णिया जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। शनिवार रात घने कोहरे के बीच डगरूआ थाना क्षेत्र के एक गैरेज में 24 वर्षीय युवती के साथ हुई हैवानियत का खुलासा घटना के 48 घंटे बाद सामने आए एक वीडियो से हुआ है, जिसमें पीड़िता अपने जख्म दिखाते हुए न्याय की गुहार लगाती नजर आ रही है।
कूपन डिपॉजिट, सारMP:सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 2018 में ट्रेन में महिला यात्री के सामने अशोभनीय व्यवहार और नशे में दुर्व्यवहार के आरोपों वाले एक न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी के आचरण को घृणित और चौंकाने वाला बताया और कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारी को बर्खास्त किया जाना चाहिए था।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुरPublished by:सौरभ भट्टUpdated Sun, 16 Nov 2025 08:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़Published by:अंकेश ठाकुरUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:13 AM IST
पुराना सब्सक्राइब, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़Published by:निवेदिता वर्माUpdated Mon, 12 Jan 2026 08:42 AM IST
स्टूडेंट सब्सक्राइब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेरPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Wed, 12 Nov 2025 08:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुरPublished by:शबाहत हुसैनUpdated Mon, 24 Nov 2025 01:21 PM IST
डाउनलोड कम्पलीट, बलरामपुर तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के एवज में अवैध धन मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है। टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने तहसील कार्यालय के समक्ष तख्ती लेकर धरना प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू और चौकीदार ने उन्हें अधिकार अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी, जबकि इसके लिए निर्धारित सरकारी शुल्क मात्र ₹10 था। दीपक यादव के पास ₹200 ही उपलब्ध थे और वह शेष ₹300 के लिए राजस्व अधिकारियों से “भीख” मांगने की बात कहते हुए धरने पर बैठे थे।







