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💢गेट💢विस्तारFollow Usसरगुजा जिले के अंबिकापुर में मणिपुर थाना क्षेत्र के हर्राटिकरा इलाके में शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाई जा रही कार अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसके परिणामस्वरूप कार सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में दो युवतियां गंभीर रूप से घायल हो गईं, जबकि कार में सवार अन्य दो युवक भी चोटिल हुए हैं।
️ऑफर सर्वे,विस्तारFollow Usबालाघाट कोतवाली थाने से 33 अपराधों में जब्त 55 लाख 13 हजार 100 रुपये नकद और करीब 14 लाख रुपये के जेवरात चोरी होने के मामले में पुलिस को अब तक शेष रकम का कोई सुराग नहीं मिला है। घटना को पांच दिन बीत चुके हैं और पुलिस की जांच अभी भी कई सवालों के घेरे में है।
सारराज्य सरकार ने जिलों के पुनर्गठन के तहत बालोतरा और बाड़मेर जिलों की सीमाओं में आंशिक संशोधन किया है। आदेश के अनुसार, गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड अब बालोतरा जिले में शामिल हो गए हैं, जबकि बायतू उपखंड बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है।
विज़िट गेट, जोया के द आर्यंस क्रिकेट एकेडमी में मैच के बाद विजेता टीम के खिलाड़ी को ट्राॅफी देते अतिथि। स
विस्तारFollow Usराजस्थान के बाड़मेर जिले के युवा दीपक शारदा ने युवाओं को प्रेरित करने वाली एक अभिनव पहल के तहत 3D नेविगेशन आधारित भारत मैप तैयार किया है। इस तकनीकी उपलब्धि की केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और गूगल जैसी बड़ी कंपनियों ने भी सराहना की है। दीपक शारदा का उद्देश्य भारत के हर गांव और गली को डिजिटल पहचान देना और आसानी से पहुंच सुनिश्चित करना है। कनाडा में पढ़ाई पूरी करने के बाद देश सेवा का जज्बा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्टार्टअप और डिजिटल क्रांति की पहल को साकार करते हुए उन्होंने यह परियोजना शुरू की।
संवाद न्यूज एजेंसी, बलौदाबाजार-भाटापाराPublished by:राहुल तिवारीUpdated Mon, 17 Nov 2025 09:37 PM IST
विन अर्न, विस्तारFollow Usराज्य सरकार ने जिलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत बालोतरा और बाड़मेर जिलों की सीमाओं में आंशिक बदलाव किया है। इस नए आदेश की अधिसूचना शुक्रवार देर रात सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर आदेश वायरल होते ही दोनों जिलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कहीं लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया तो कहीं असंतोष और नाराजगी भी दिखाई दी।
साप्ताहिक ईज़ी सारपीसीसी सचिव ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए हालिया बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी है। ऐसे में 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अब अरावली पहाड़ी नहीं माना जाएगा।
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