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💢अल्ट्रा डिपॉजिट💢कांग्रेस शासन में भूपेश बघेल सरकार के दौरान खोले गए स्वामीआत्मानंद स्कूल निपनिया में विधायक इन्द्र साव ने आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें भारी अनियमितताएं सामने आईं। स्कूल में शौचालय और कक्षाओं में गंदगी पाई गई, अवैध शुल्क वसूली की जानकारी मिली और संस्था के प्राचार्य बिना सूचना स्कूल से अनुपस्थित मिले। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए विधायक ने दूरभाष पर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराया और जांच व कार्रवाई की मांग की।
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पुराना टास्क, सारमध्यप्रदेश में घना कोहरा और शीतलहर का असर जारी है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री के करीब पहुंच गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। कम विजिबिलिटी के कारण यातायात और रेल सेवाएं प्रभावित हैं। तेज ठंड को देखते हुए 24 जिलों में स्कूलों में छुट्टी और कुछ जिलों में समय बदला गया है।
औरैया। लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे जिले के पांच डॉक्टरों को शासन ने बर्खास्त कर दिया है। इनमें से कोई डॉक्टर आठ तो कोई दस साल से भी अधिक समय से अनुपस्थित चल रहा था।
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छोटा साइन अप अंबाला सिटी। फसल अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट, नवाचारपूर्ण और परिणामोन्मुख कार्य के लिए कृषि विभाग अंबाला को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान जिले में खेतों में आग की घटनाओं में अभूतपूर्व कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रभावी रणनीति अपनाने के लिए प्रदान किया गया। पुरस्कार बीते दिनों नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया गया। सम्मान डाॅ. जसविंद्र सिंह, डॉ. राजेश अग्रवाल, करण सिंह, प्रवीन, दीनदयाल शर्मा व मनदीप सिंह ने प्राप्त किया। फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत अपनाई गई योजनाबद्ध, डेटा आधारित और फील्ड स्तर पर सख्त निगरानी वाली कार्यप्रणाली के कारण जिले में खेतों में आग की घटनाओं में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2023 में जहां 195 फायर घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह 99 रह गईं। वर्ष 2025 में पूरे अंबाला जिले में केवल 8 फायर घटनाएं दर्ज की गईं। संवादकृषि विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड मिला। सूचना विभाग
बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।
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