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💢डायमंड डाउनलोड💢चरखी दादरी। नेशनल हाईवे 334बी पर दादरी जिले के गांव भैरवी के समीप सोमवार सुबह कोहरे के दौरान दो ट्रालों की टक्कर हो गई। करीब एक घंटे बाद बाढड़ा की तरफ से आ रही एक वैगन-आर कार भी सड़क पर खड़े क्षतिग्रस्त ट्राले से टकरा गई। हादसे में कार में सवार तीन लोग घायल हो गए। जिन्हें उपचार के लिए रोहतक के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
️अर्न कलेक्ट,अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:Digvijay SinghUpdated Mon, 10 Nov 2025 04:35 PM IST
1954 से 2024 तक- 27 बार देश के तत्कालीन राष्ट्रपति ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से किसी-न-किसी को नवाजा। ज्यादातर बार सूची में एक नाम रहे। कुछ बार दो या अधिक नाम। 'भारत रत्न' सम्मान इस साल दिए जाएंगे, इसकी गारंटी नहीं। लेकिन, इसपर चर्चा खूब चल निकली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुराने मित्र और लंबे समय तक उनकी पार्टी के राष्ट्रीय चेहरा रहे केसी त्यागी ने उनके लिए 'भारत रत्न' की मांग दिल्ली में की, हंगामा बिहार में मचा। हंगामे को बढ़ाया तेज प्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव के लिए भी इसी सम्मान की मांग कर। तो, क्या आगे जब भी 'भारत रत्न' का एलान होगा तो किसी बिहारी का नाम होगा? सवाल इसलिए भी, क्योंकि 2024 में 'भारत रत्न' के एलान ने बिहार की राजनीति सीधे पलट दी थी।
फ्रेंड्स रिसीव, सारBhilwara News: माण्डलगढ़-भीलवाड़ा एनएच-758 पर बीगोद के पास ट्रेलर और इको कार की आमने-सामने भिड़ंत में दो लोगों की मौत हो गई और तीन गंभीर घायल हुए। पुलिस ने रेस्क्यू कर घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जांच जारी है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुरPublished by:बुरहानपुर ब्यूरोUpdated Fri, 31 Oct 2025 09:20 AM IST
सलूणी (चंबा)। सलूणी के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि छह साल से बंद पड़े कोल्ड स्टोर को फिर से चालू किया जाएगा। इससे उनकी बे‑मौसमी सब्जियों को खराब होने से बचाने और बेहतर दाम पाने में मदद मिलेगी।
कलेक्ट, IranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCबीवी ने मरवा डाला पतिRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest Bengalयूपी
सर्वे न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ाPublished by:प्रिया वर्माUpdated Wed, 08 Oct 2025 04:36 PM IST
सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
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