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सर्वे पैसे, विस्तारFollow Usमकर संक्रांति का पर्व, जो पारंपरिक रूप से खिचड़ी के बिना अधूरा सा लगता है, इस वर्ष एक विशेष संयोग के कारण अपने पारंपरिक स्वरूप में नहीं मनाया जा सकेगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी का भी पर्व पड़ रहा है, जो 19 वर्षों बाद ऐसा संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल से बनी किसी भी सामग्री का सेवन वर्जित होता है।
विस्तारFollow Usउत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) अगले सप्ताह से अधिकतम गति (90 किमी. प्रति घंटा) से मेट्रो के ट्रायल करेगा। सिग्नल, ट्रैकिंग, पावर सिस्टम के बाद अंत में डमी यात्रियों के साथ ट्रायल होगा। इसके बाद अप्रैल से मेट्रो आरबीएस स्टेशन तक चलने लगेगी।
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्याUpdated Sun, 11 Jan 2026 08:37 PM IST
गोल्ड विन, सारराज्य सरकार ने जिलों के पुनर्गठन के तहत बालोतरा और बाड़मेर जिलों की सीमाओं में आंशिक संशोधन किया है। आदेश के अनुसार, गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड अब बालोतरा जिले में शामिल हो गए हैं, जबकि बायतू उपखंड बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है।
कमेंट Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal
छत्तीसगढ़ में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। हत्या, दुष्कर्म, गैंगवार और मारपीट की घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में अंबिकापुर शहर से एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जहां एक भाजपा महिला पार्षद के पुत्र समेत करीब एक दर्जन युवकों ने दो छात्रों की बेरहमी से पिटाई कर दी। पूरी घटना सोमवार रात करीब साढ़े नौ बजे की बताई जा रही है। शहर के नमनाकला खटिकपारा निवासी राहुल सोनवानी, पिता पन्नेलाल, अपने दोस्त शुभम रवि के साथ दर्रीपारा स्थित अंबेडकर वार्ड में विकास साहू के मकान में किराए पर रहकर पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान दर्रीपारा निवासी उदय साहू, उत्तम साहू, आकाश यादव, अखिल सोनी, समीर मुंडा, रौनक मुखर्जी सहित 2-3 अन्य युवक अचानक उनके कमरे में घुस आए।
क्लिक साइन अप, बहराइच/शिवपुर। परसा अगैया गांव में 10 वर्षीय विवेक वर्मा की निर्मम हत्या के मामले में अदालत द्वारा आरोपी अनूप वर्मा को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भले ही पीड़ित परिवार को न्याय की अनुभूति हुई हो, लेकिन कानूनी रूप से यह मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। कानून के मुताबिक फांसी की सजा पाए किसी भी अभियुक्त के मामले में आगे की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से उच्च न्यायालय से होकर गुजरती है।







