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💢इंस्टेंट शेयर💢बलरामपुर तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के एवज में अवैध धन मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है। टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने तहसील कार्यालय के समक्ष तख्ती लेकर धरना प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू और चौकीदार ने उन्हें अधिकार अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी, जबकि इसके लिए निर्धारित सरकारी शुल्क मात्र ₹10 था। दीपक यादव के पास ₹200 ही उपलब्ध थे और वह शेष ₹300 के लिए राजस्व अधिकारियों से “भीख” मांगने की बात कहते हुए धरने पर बैठे थे।
️विज़िट पैसे,मछली का जाल निकालते समय तालाब में डूबा युवक, मौत- फोटो : अमर उजाला
क्रिकेट मैच : विरासत ए कहलूर प्रतियोगिता के फाइनल मैच सुबह 9:30 बजे शुरू होंगे।
डायमंड इनवाइट, सारमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर वर्ग के विकास के लिए काम कर रही है। व्यापार जगत और उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई है, जिससे कई वस्तुओं की कीमतें घटी हैं और आम लोगों को सीधा लाभ मिला है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Sat, 10 Jan 2026 05:57 PM IST
सारआरोपियों के कब्जे से चोरी की तीन मोटरसाइकिल और एक एक्टिवा बरामद की गई है, जिनकी कुल कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई जा रही है।
सारमुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो बुजुर्ग महिलाओं को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। इस त्रुटि के कारण उनका नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया है, जिससे वे राशन प्राप्त करने से वंचित हैं।
रिवॉर्ड्स, 😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
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सारराष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा और सासाराम की विधायक स्नेहलता कुशवाहा बांका पहुंचे और नगर भवन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन सह सम्मान मिलन समारोह में उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
क्लिक, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल पर कथित हेट स्पीच का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और पुलिस जांच की निगरानी समेत अन्य मांगें करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि चल रही आपराधिक जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी का निर्देश दिया जा सकता है। इसके अलावा जांच के तरीके या वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी जैसे निर्देश देना आपराधिक जांच के माइक्रो मैनेजमेंट जैसा होगा, जो कोर्ट के दायरे में नहीं आता।







