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💢सिल्वर कैश💢सारबालाघाट जिले के रूपझर थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की 123 बटालियन ने नक्सलियों का विस्फोटक डंप बरामद किया है। समर्पित नक्सलियों की सूचना पर जंगल में सघन तलाशी अभियान चला। हाई एक्सप्लोसिव समेत खतरनाक सामग्री जब्त की गई। यह नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मानी जा रही है।
️अर्न वीडियो,संवाद न्यूज एजेंसी, आगराUpdated Tue, 13 Jan 2026 02:48 AM IST
विस्तारFollow Usमहाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (एमएमसी जोन) के प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखकर सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को रोकने की अपील की है। इस पत्र में उन्होंने इस बार 'नक्सली सप्ताह' न मनाने की घोषणा भी की है और सरकार से पुनर्वास के लिए समय मांगा है।
पैसे ईज़ी, पानीपत। जनवरी माह में लगातार बढ़ रही सर्दी का असर सेहत पर भी नजर आने लगा है। नौनिहालों में विंटर डायरिया का खतरा बढ़ा है। 10 साल तक की उम्र के बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसके साथ ही नजला, जुकाम, खांसी और बदन दर्द की समस्या लेकर भी लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विस्तारFollow Usएक धार्मिक स्थल में प्रार्थना सभा के दौरान बीमारी का उपचार करने की आड़ में धर्म परिवर्तन की सूचना पर पहुंचे बजरंग दल व विश्व हिंदू परिषद कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। पुलिस ने प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों से बात की। पुलिस ने धर्म परिवर्तन की बात से इनकार किया है।
फ्री, सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की पावन दरगाह में सोमवार को भारत सरकार की ओर से दूसरी बार चादर पेश करने केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरेन रिजिजू अजमेर पहुंचे। दरगाह परिसर स्थित महफिलखाने में दरगाह दीवान के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती सहित दरगाह कमेटी के सदस्यों ने उनकी पारंपरिक दस्तारबंदी कर स्वागत किया। इस अवसर पर दरगाह परिसर में सूफियाना रंग और अकीदत का माहौल नजर आया।
ईज़ी फ्रेंड्स सारBanswara News: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आदिवासियों ने सदियों से हमारी प्रकृति ओर संस्कृति को सहेजा है। भगवान बिरसा मुंडा ने 15 साल की उम्र में ही अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर देश में आजादी की क्रांति जगाई।
विस्तारFollow Usअल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।
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