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सारAjmer:राजस्थान लोक सेवा आयोग ने डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) भर्ती परीक्षा 2025 के प्रवेश-पत्र जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट और एसएसओ पोर्टल से प्रवेश-पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
वीडियो, कोतमा निवासी पूजा जैन का एमपीपीएससी की परीक्षा में डीएसपी के पद पर चयन हुआ है। पूजा के पति श्रेयांश जैन वर्तमान में भोपाल में रेंजर के पद पर पदस्थ हैं और बीते वर्ष ही उनकी शादी हुई थी। वर्तमान में दोनों भोपाल में ही रह रहे हैं, इससे पहले भी पूजा का चयन एमपीपीएससी के जरिए जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर हुआ था, जहां भोपाल में वर्तमान में उनकी पदस्थापना है। जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर चयनित होने के बावजूद भी पूजा ने अपनी तैयारी बंद नहीं की और कार्य की व्यस्तता के बावजूद वह नियमित रूप से इसकी तैयारी करती रही।
बलौदाबाजार भाटापारा जिले में पल्स पोलियो अभियान शुरू- फोटो : अमर उजाला
आरपीएफ जवान शहजाद ने सूझबूझ से बचाई महिला की जान- फोटो : अमर उजाला
सार26 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें अशोकनगर जिले के मूढ़रा बरवाह गांव के गजराज लोधी और उनके भाई रघुराज लोधी ने मारपीट और मानव मल खिलाने का आरोप लगाया था। लेकिन, अब पीड़ित अपने बयान से पटल गया है।
नया रजिस्टर,
सब्सक्राइब कूपन गोरखपुर ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:00 AM IST
अशोकनगर केतुलसी सरोवर पार्क में योग अभ्यास के दौरान सराफा कारोबारी नरेंद्र सोनी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब वे सूर्य नमस्कार कर रहे थे। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वे जमीन पर गिरकर अचेत हो गए।
टास्क, विस्तारFollow Us73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।







