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💢इंस्टेंट💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंडPublished by:अर्पित याज्ञनिकUpdated Mon, 01 Dec 2025 10:48 AM IST
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अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:अनुज कुमारUpdated Wed, 10 Dec 2025 09:07 PM IST
विशेष फ्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चमोलीUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:42 PM IST
विस्तारFollow UsDantewada News: केंद्र की मोदी सरकार की ओर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने और उसमें संशोधन के खिलाफ शनिवार को स्थानीय राजीव भवन दंतेवाड़ा में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पीसीसी के संयुक्त महामंत्री उमाशंकर शुक्ला ने कहा मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है।
भागलपुर में लगातार बढ़ते अतिक्रमण और उससे उत्पन्न हो रही गंभीर यातायात समस्या को लेकर जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने और आम लोगों को जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से गुरुवार को लोहिया पुल से लेकर ततारपुर चौक तक व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और सड़क किनारे अवैध रूप से दुकानें लगाने वाले दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
विस्तारFollow Usमध्य प्रदेश के बैतूल जिले में कफ सिरप पीने से दो बच्चों की मौत के बाद अब एक और बच्चा जिंदगी की जंग लड़ रहा है। तीसरे बच्चे की किडनी पूरी तरह फेल हो गई हैं। वह इस समय नागपुर मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं के सेवन से बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
सुपर इनवाइट, चंबा। वन मंडल चंबा में कशमल की जड़ों के दोहन को लेकर स्थानीय लोग व ठेकेदार आमने सामने हो गए हैं। अब तक ठेकेदार लोगों को दस रुपये प्रति किलो की दर से कशमल जड़ों का दाम दे रहे थे जबकि दवा कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग दाम बढ़ाने की मांग पर अड़ गए हैं। अब वे दस रुपये की जबह 18 रुपये प्रति किलो दाम देने की मांग कर रहे हैं। यह दाम चुकाने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हाे रहे हैं। इसके चलते कशमल दोहन क्षेत्र में थम गया है। हालांकि, कुछ इलाकों में लोग इसके दोहन का विरोध भी कर रहे हैं। कुछ मात्रा में उन्होंने उखाड़ी गई कशमल को जलाया भी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग अब दाम बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब लोगों व ठेकेदार के बीच में फंस गया है। विभाग चाहकर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विभाग के कर्मचारी सही तरीके से कशमल दोहन पर निगरानी रख सकते हैं। ये जड़ें स्थानीय लोग किस दाम पर बेच रहे हैं और ठेकेदार आगे किस दाम पर बेच रहा है, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है।
सर्वे कैश वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:35 AM IST
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