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💢वॉच कैश💢पवित्र नगरी अमरकंटक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को दंपति के साथी 4 वर्षीय बालक को जहरीला पेज खाने से बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया। इन तीनों ने घर में कोदो कुटकी का पेज खाया था।

️मेगा वॉच,इंदौर में हादसे के बाद भी नहीं चेत रही नगरपालिका, नलों से तीन से चार बार आता है नाली का गंदा पानी

बांसवाड़ा कोर्ट ने विक्रम दर्जी को सुनाई एक साल की कैद की सजा- फोटो : अमर उजाला

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अल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।

विस्तारFollow Usकिशनगंज थाने के सामने स्थित माताजी के मंदिर हुई चोरी को लेकर किशनगंज पहुंचे विधायक ललित मीणा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मौके से फोन पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश चौधरी को फटकार लगाते हुए पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

आगर मालवा में स्थित बाबा बैजनाथ का मंदिर- फोटो : अमर उजाला

अल्ट्रा वॉच, 73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर  उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।

पॉइंट्स कलेक्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Tue, 04 Nov 2025 06:57 PM IST

सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के अवसर पर शनिवार रात अजमेर स्थित दरगाह शरीफ में परंपरागत सालाना संदल की रस्म पूरे अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। उर्स की शुरुआत से एक दिन पूर्व निभाई जाने वाली इस विशेष रस्म में दरगाह के खादिम समुदाय के साथ देशभर से पहुंचे हजारों जायरीन शामिल हुए।

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