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💢ट्रांसफर ईज़ी💢सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
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ईज़ी,
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावतUpdated Sat, 10 Jan 2026 10:45 PM IST
चरखी दादरी। मनरेगा कोई दया या सरकारी योजना नहीं बल्कि गरीब, वंचित, पीड़ित और असहाय वर्ग के लोगों के लिए रोजगार का सांविधानिक अधिकार है। यह कानून कांग्रेस की ओर से लाया गया था ताकि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों को सम्मान के साथ काम और जीवनयापन का साधन मिल सके। यह बात अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और हरियाणा के सहप्रभारी अधिवक्ता जितेंद्र बघेल ने शनिवार को दादरी में कही। वे एआईसीसी के आह्वान पर चल रहे मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत जिला कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
ट्रांसफर वीडियो, भारत-यूके सेना का संयुक्त सैन्य अभ्यास- फोटो : अमर उजाला
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रिवॉर्ड्स सर्वे, भीलवाड़ा जिले के इंरास गांव में अंधविश्वास के कारण एक नौ महीने के मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। मामूली सर्दी-जुकाम और सांस लेने में परेशानी से पीड़ित बच्चे को अस्पताल ले जाने के बजाय परिजन गांव के भोपा (झाड़-फूंक करने वाले) के पास ले गए। भोपा ने इलाज के नाम पर गर्म सरिए से बच्चे के शरीर पर कई जगह दाग लगा दिए। इससे उसकी हालत और बिगड़ गई और तीन दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद शनिवार रात मासूम ने दम तोड़ दिया।







