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वीआईपी फ्री, Inc

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💢कूपन क्लिक💢सारबीजापुर जिले में  माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन के दौरान बड़ी साजिश को नाकाम किया गया है।सीआरपीएफ की 214वीं वाहिनी की टीम एफओबी कांडलापर्ती-2 से क्षेत्र में गश्त एवं सर्च ऑपरेशन के लिए निकली थी।

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कंदवा। क्षेत्र के कोदई स्थित साधन सहकारी समिति असना में बृहस्पतिवार को सुबह से नंबर लगाने के बावजूद खाद न मिलने से नाराज किसानों ने समिति के सचिव और एक किसान संगठन के मंडल प्रवक्ता को पांच घंटे तक कमरे में बंद रखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ज्योंही दरवाजा खोला किसान यूनियन का तथाकथित मंडल प्रवक्ता मौके से भाग निकला। करीब पांच घंटे बाद रात नौ बजे एआर कोऑपरेटिव श्रीप्रकाश उपाध्याय मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाकर और दो दिन पर्याप्त खाद वितरित कराने का आश्वासन देकर शांत कराया। इसके बाद किसानों ने सचिव को मुक्त कर दिया।

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जन्म लेते ही नवजात को पुलिया के नीचे फेंका, SNCU में भर्ती।

इंस्टेंट कैश, चंबा। वन मंडल चंबा में कशमल की जड़ों के दोहन को लेकर स्थानीय लोग व ठेकेदार आमने सामने हो गए हैं। अब तक ठेकेदार लोगों को दस रुपये प्रति किलो की दर से कशमल जड़ों का दाम दे रहे थे जबकि दवा कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग दाम बढ़ाने की मांग पर अड़ गए हैं। अब वे दस रुपये की जबह 18 रुपये प्रति किलो दाम देने की मांग कर रहे हैं। यह दाम चुकाने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हाे रहे हैं। इसके चलते कशमल दोहन क्षेत्र में थम गया है। हालांकि, कुछ इलाकों में लोग इसके दोहन का विरोध भी कर रहे हैं। कुछ मात्रा में उन्होंने उखाड़ी गई कशमल को जलाया भी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग अब दाम बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब लोगों व ठेकेदार के बीच में फंस गया है। विभाग चाहकर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विभाग के कर्मचारी सही तरीके से कशमल दोहन पर निगरानी रख सकते हैं। ये जड़ें स्थानीय लोग किस दाम पर बेच रहे हैं और ठेकेदार आगे किस दाम पर बेच रहा है, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है।

छोटा मोबाइल

अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Tue, 06 Jan 2026 07:24 PM IST

डाउनलोड कमेंट, जिले की सात निकायों में करीब 200 स्ट्रीट लाइटें खराब हो गई हैं। सभी स्ट्रीट लाइटें सात से आठ महीने पहले ही लगी थी। करीब पांच करोड़ रुपये खर्च कर लगाई गईं स्ट्रीट लाइटें सालभर भी नहीं चल सकी। बड़ी स्ट्रीट लाइटों के अलावा छोटी लाइटें भी बड़ी संख्या में खराब है। वहीं लाइटों की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाए तिरंगा वाले झालर भी बुझ गए हैं। एडीएम के मुताबिक लाइट की गारंटी दो साल तक हो ती है।

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