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💢वेरिफाई शेयर💢सारBaran Accident: किशनगंज के पास हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रॉले ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे किसान दीपक मेहता की मौके पर मौत हो गई। तीन बहनों का इकलौते भाई और घर के कमाने वाले दीपक की मौत से गांव में शोक का माहौल है।
️कमेंट अर्न,सारपंजाब का सामाजिक ढांचा संयुक्त परिवार और बुजुर्गों के आशीर्वाद पर टिका है। लोहड़ी के अवसर पर घर की पुत्रवधुएं सास-ससुर और अन्य बुजुर्गों को लोई, शॉल या गर्म कपड़े भेंट करती हैं। यह रस्म पीढ़ियों के बीच सम्मान, कृतज्ञता और स्नेह का सेतु है। संदेश साफ है- जिस घर में बुजुर्गों का मान, वहां खुशहाली का वास।
सारसूफी संत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की पुत्री बीबी हाफ़िज़ा का सालाना उर्स श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवायतों के साथ संपन्न हुआ। देश-विदेश से आए अकीदतमंदों ने महफ़िल-ए-समां में भाग लिया।
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अतरौलिया में हादसे के बाद घायलों को एंबुलेंस में लिटाता कर्मी। संवाद- फोटो : संवाद
बागेश्वर। ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले के लिए शिव की नगरी पूरी तरह सज-धजकर तैयार हो रही है। मेले की तैयारियां अब अपने अंतिम चरणों में हैं। नुमाइश मैदान में मेलार्थियों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले झूलों और चरखों को स्थापित कर दिया गया है। नगर के पुलों को रंग-बिरंगी लाइटों की झालरों से जगमग किया गया है।
लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर बुलडोजर पर चढ़कर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का फूल बरसाकर स्वागत करत
रिसीव, विस्तारFollow Usमध्यप्रदेश में सर्दी ने एक बार फिर अपना तीखा असर दिखाया है। शुक्रवार सुबह घने कोहरे के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा।सुबह ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग के 17 जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाया रहा। गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात प्रदेश में छतरपुर जिले का खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में पारा 3.9 डिग्री, शिवपुरी में 4 डिग्री और राजगढ़ में 5 डिग्री तक लुढ़क गया। पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री, मंडला में 5.9 डिग्री, रीवा में 6 डिग्री, उमरिया में 6.4 डिग्री तथा सीधी और टीकमगढ़ में 6.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
ट्रांसफर कमाई वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:42 PM IST
अतिरिक्त डिस्काउंट, मुंबई, जिसे देश की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं, 106 वीरों के बलिदान से यह शहर अस्तित्व में आया। ये मराठी लोग संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन में शहीद हुए थे। आज इसी मुंबई के बीएमसी चुनाव में मराठी अस्मिता एक बड़ा मुद्दा बन गया है।







