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💢कूपन💢बलिया/पंदह। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत जनपद के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में प्रवेश का अवसर मिल गया है। सत्र 2026-27 में जिले के 773 निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्री-प्राइमरी और कक्षा एक की सीटों के सापेक्ष 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश कराया जाएगा। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन का पत्र मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
️साप्ताहिक अर्न,सारघायल महिला के पति कुलदीप ने बताया कि वह और उनकी पत्नी पिछले कुछ दिनों से लगातार धमकी भरी कॉल्स से परेशान थे। कॉल करने वाले खुद को अपराधी बताते हुए पैसों की मांग कर रहे थे और अंजाम भुगतने की धमकी दे रहे थे।
विस्तारFollow Usबारां जिले के किसानों की समस्याओं को लेकर अंता से नव निर्वाचित विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया के नेतृत्व में जिला कांग्रेस कमेटी बारां ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर धरना–प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस वर्ष भारी अतिवृष्टि के चलते किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं, लेकिन भाजपा सरकार द्वारा न तो इस वर्ष का और न पिछले वर्ष का मुआवजा अब तक दिया गया है, जबकि किसानों से प्रीमियम के नाम पर बड़ी राशि काटी जा चुकी है।
साइन अप ईज़ी, संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगरUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:37 PM IST
विस्तारFollow Usराष्ट्रीय राजमार्ग 43 के किनारे ग्राम पोड़ी के पास शनिवार-रविवार की दरमियानी रात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। यहां मोहम्मद सादिक मंसूरी उर्फ जानू कबाड़ी के सांई धर्मकांटा के पास पांच ट्रकों में अवैध रूप से लोहे का कबाड़ लोड किया जा रहा था। कोतवाली पुलिस ने छापेमार कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया और ट्रकों में भरा माल जब्त कर लिया। जब्त किए गए लोहे के कबाड़ की कीमत करीब 25 लाख रुपये आंकी गई है।
बैठक को संबोधित करती जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया।
अतरौली में जाम लगाकर प्रदर्शन करते हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता- फोटो : संवाद
वॉच, हजपुरा (अंबेडकरनगर)। अकबरपुर क्षेत्र के कहरा सुलेमपुर गांव और आसपास के सात गांवों के लोगों के लिए वर्षों से चली आ रही आवागमन की समस्या का समाधान होने जा रहा है। बदहाल रास्तों के कारण ग्रामीणों को एक किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, जो खासकर बरसात के मौसम में और भी विकराल रूप ले लेती थी। जलभराव की स्थिति ऐसी हो जाती थी कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता था, जिससे स्कूली बच्चों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था।
विशेष डिस्काउंट एजुकेशन डेस्क, अमर उजालाPublished by:आकाश कुमारUpdated Wed, 05 Nov 2025 07:37 PM IST
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