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💢वेरिफाई विन💢सारBihar:हादसे के बाद स्थिति इतनी भयावह थी कि ट्रक में फंसे दो शवों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जिला प्रशासन की टीम और जेसीबी की मदद से शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया।
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ज्ञानपुर। जिले के 25 राजकीय और 10 वित्तपोषित विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को व्यवसायिक शिक्षा दी जाएगी। विद्यालयों में लैब एवं उपकरण आदि की व्यवस्था की जाएगी। संसाधन और सुविधाएं बढ़ाने के लिए स्कूलों में पांच-पांच लाख की लागत से लैब बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग के भेजे गए प्रस्ताव पर निदेशालय ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। जल्द ही लैब का निर्माण शुरू हो जाएगा।
ऑनलाइन, अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Fri, 21 Nov 2025 10:20 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:44 PM IST
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एनटीपीसी कहलगांव स्थित अंग भवन में शनिवार को समर्थ मिशन के सहयोग से बायोमास को-फायरिंग विषय पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मिशन के तहत देश के तमाम तापीय विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कार्यशाला में समर्थ मिशन के निदेशक रवि प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि बायोमास को-फायरिंग नीति के तहत देश के ऊर्जा संयंत्रों में कृषि अवशेषों से 28 गीगावॉट बिजली उत्पादन संभव है। इस मिशन के अंतर्गत देश के सभी विद्युत परियोजनाओं में इसका प्रयोग किया जा रहा है।
कूपन ऑनलाइन, राजस्थान के सीकर जिले के नेहरा की ढाणी गांव के रहने वाले स्व. सुरेंद्र का शव मृत्यु के 56 दिन बाद शुक्रवार सुबह दुबई से जयपुर पहुंचेगा। 33 वर्षीय सुरेंद्र 27 जुलाई को रोजगार के लिए जयपुर से दुबई गए थे। लेकिन 2 अगस्त को उनकी अबूधाबी (यूएई) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद भी उनका शव भारत नहीं भेजा गया और दुबई में ही रोक लिया गया। छोटे भाई सुरजीत सिंह के दुबई जाकर डीएनए सैंपल देने के बावजूद यूएई पुलिस और भारतीय दूतावास की ओर से 19 सितंबर को कहा गया कि शव को भारत भेजने में अभी एक महीना या उससे भी अधिक समय लग सकता है।
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जाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।
गेम विथड्रॉ, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Mon, 29 Sep 2025 06:36 PM IST







