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️वीआईपी विज़िट,वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:41 PM IST
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठीUpdated Mon, 12 Jan 2026 12:19 AM IST
सिल्वर फ्रेंड्स, वाराणसी ब्यूरोUpdated Thu, 08 Jan 2026 01:38 AM IST
विस्तारFollow Usविश्वविख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस मामले में नया मोड़ तब आया है, जब महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर जिला न्यायालय में याचिका दायर करने की घोषणा की है।
73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।
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सर्वे रोते हुए छात्राएं। (सांकेतिक तस्वीर)- फोटो : freepik
SRMU Admission 2025:सीयूईटी (CUET - Common University Entrance Test) अब भारत में स्नातक में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। छात्रों के पास अब यह सुनहरा मौका है कि वे अपने सपनों के हिसाब से ऐसे कोर्स चुनें जो आने वाले समय में उनकी करियर ग्रोथ को दिशा दे सके। CUET 2025 सिर्फ एक एग्जाम पास करने की बात नहीं है, बल्कि यह समझदारी से अपने फ्यूचर को बनाने के लिए सही कोर्स चुनने का मौका है। ऐसे कोर्स चुनना जरूरी है जो आपको अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ इंडस्ट्री के मुताबिक स्किल्स और प्रैक्टिकल नॉलेज भी दें।
छोटा विथड्रॉ, प्रदेश के वागड़ क्षेत्र में अनेक प्राचीन स्थल हैं, जो श्रद्धा, संस्कृति और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हीं में से एक है मानगढ़ धाम, जिसे आदिवासी समाज अपनी आस्था और शौर्य का पावन प्रतीक मानता है। यह स्थान केवल धार्मिक भावना से ही नहीं, बल्कि आदिवासियों की अमर शहादत की स्मृतियों से भी भरा हुआ है।







