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💢अल्ट्रा ट्रांसफर💢बाराबंकी। लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे सोमवार को केवल यातायात मार्ग नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन और उत्सव का विराट मंच बन गया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के स्वागत में हाईवे करीब चार घंटे तक उत्सव पथ में तब्दील रहा। सड़क किनारे लगी फूल बरसाने वाली मशीनें, 24 से अधिक बुलडोजरों पर सवार कार्यकर्ताओं की पुष्प-वर्षा और भगवान राम व हिंदुत्व को समर्पित डीजे गीतों पर झूमता जनसैलाब... हर दृश्य यह संदेश दे रहा था कि बाराबंकी में भाजपा का संगठनात्मक दमखम पूरे उफान पर है।
️कलेक्ट रिवॉर्ड्स,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतराPublished by:बालोतरा ब्यूरोUpdated Mon, 22 Dec 2025 08:53 PM IST
सहकारी शक्कर कारखाने में शुरू नहीं हुआ पेराई- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला नेटवर्क, भाटापाराPublished by:विजय पुंडीरUpdated Fri, 14 Nov 2025 11:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवरPublished by:अलवर ब्यूरोUpdated Sat, 03 Jan 2026 03:57 PM IST
Banswara News: बांसवाड़ा में बढ़ती सर्दी के बीच बेघर और जरूरतमंद लोग खुले आसमान तले रात बिताने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन और नगर परिषद के दावों के बावजूद रैनबसेरों में व्यवस्था नदारद है।
प्लेटिनम वेरिफाई, डाक अधिक्षक डाक वस्तु भंडार प्रपत्र एवं मुद्रा अलीगढ़- फोटो : संवाद
बड़ा रिवॉर्ड्स बालोद जिले के नेशनल हाईवे 30 पर पुटटू ढाबा के पहले हुए सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। ग्राम कनेरी, गुरूर निवासी भीषम कुमार यादव बाइक से अपने घर लौट रहे थे, तभी किसी अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी, जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतक एक बैंक में काम करता था।
कैश डिस्काउंट, 73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।







