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️फ्री कमाई,1. भारतीय जनता पार्टी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं घोषित करेगी। 2. बिहार चुनाव में जीत के बाद भी भाजपा नीतीश कुमार को सीएम नहीं बनाएगी। 3. नीतीश कुमार बीमार हैं, बिहार के मतदाता उन्हें सीएम नहीं बनाएंगे।- यह तीन बातें पिछले साल, यानी 2025 में विपक्ष ने खूब प्रचारित की थी। यह सब बेकार चला गया तो 2026 की मियाद के साथ यह प्रचारित किया जा रहा है कि वह रिटायर हो जाएंगे। लेकिन, नीतीश कुमार तो अलग मूड में हैं। जवाब तो उन्होंने चुनाव के दौरान भी दिया, जीत के बाद भी। अब नए साल की शुरुआत के साथ और बड़े स्तर पर जवाब देने जमीन पर उतर रहे हैं।
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विस्तारFollow Usएनटीपीसी कहलगांव स्थित अंग भवन में शनिवार को समर्थ मिशन के सहयोग से बायोमास को-फायरिंग विषय पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मिशन के तहत देश के तमाम तापीय विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। कार्यशाला में समर्थ मिशन के निदेशक रवि प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि बायोमास को-फायरिंग नीति के तहत देश के ऊर्जा संयंत्रों में कृषि अवशेषों से 28 गीगावॉट बिजली उत्पादन संभव है। इस मिशन के अंतर्गत देश के सभी विद्युत परियोजनाओं में इसका प्रयोग किया जा रहा है।
विस्तारFollow Usजिले में धान खरीदी व्यवस्था एक गंभीर संकट का सामना कर रही है। उपार्जन केंद्रों से धान का समय पर उठाव न होने के कारण, जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नौ जनवरी 2026 से जिले में धान खरीदी बंद करनी पड़ सकती है।
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावतUpdated Mon, 12 Jan 2026 12:38 AM IST
कूपन विन, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आपसी मिठास घोलने के लिए कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय, सदाकत आश्रम में 'दही-चूड़ा भोज' का आयोजन किया गया था। प्रदेश अध्यक्ष के इस न्योते पर कांग्रेस के ही 6 विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक न होने के संकेत दे दिए हैं।
वेरिफाई जन्म लेते ही नवजात को पुलिया के नीचे फेंका, SNCU में भर्ती।
विस्तारFollow Usउत्तराखंड में इस साल कम बर्फबारी और बारिश ने राज्य की आर्थिकी पर गहरी चोट की है। इससे न सिर्फ पहाड़ों में पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है बल्कि फसलों पर भी मार पड़ी है। यही नहीं बारिश और बर्फबारी न होने से जंगल में आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं। स्थिति यह है कि 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ में आमतौर पर दिसंबर में बर्फ की चादर जम जाती थी, लेकिन इस वर्ष जनवरी के करीब मध्य तक क्षेत्र पूरी तरह बर्फ विहीन बना हुआ है। यहां पर पहली बार ऐसी स्थिति देखी जा रही है। इससे विशेषज्ञ भी पौधों के प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित होने की आंशका जता रहे हैं। राहत की बात है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद से बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है।
सिल्वर वीडियो, लेखक संघ बिलासपुर की मासिक मौजूद लेखक और अन्य लोग । स्त्रोत संघ







