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️साप्ताहिक साइन अप,विस्तारFollow Usमोगा नगर निगम में मेयर के इस्तीफे के बाद लंबे समय से लंबित चल रहे मेयर चुनाव को लेकर अब स्थिति साफ हो गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि 31 जनवरी 2026 से पहले हर हाल में मोगा नगर निगम के मेयर का चुनाव करवाया जाए। यह फैसला नगर निगम मोगा के 9 कांग्रेसी पार्षदों द्वारा दायर सिविल रिट याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया गया। याचिका दायर करने वाले पार्षदों में साहिल अरोड़ा, अमनप्रीत कौर मान, तरसेम सिंह, राम कौर, मनजीत कौर गिल, विजय खुराना, जसप्रीत सिंह विक्की सरपंच, रीमा सूद और अमरजीत अम्बी शामिल हैं।
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादूनPublished by:अलका त्यागीUpdated Tue, 13 Jan 2026 02:30 AM IST
वीडियो, विस्तारFollow Usडीग जिले के कामां थाना क्षेत्र में मां-बेटे के रिश्ते को शर्मसार कर दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। राधा नगरी गांव में एक नाबालिग बेटे ने पैसे लौटाने को लेकर हुए विवाद में अपनी ही मां की लोहे की रॉड से हमला कर निर्मम हत्या कर दी। घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
सारभरतपुर के कुम्हेर थाना क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर जहर देकर हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस जांच में जुटी है।
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुरPublished by:विजय पुंडीरUpdated Sun, 07 Dec 2025 05:40 PM IST
विस्तारFollow Us।छत्तीसगढ़ भवन में उस समय राजनीति का एक दुर्लभ और सुखद दृश्य देखने को मिला, जब पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव से मिलने प्रदेश के पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल पहुंचे इस मुलाकात के दौरान मंत्री अग्रवाल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। वहीं, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भी पैर छूकर राजनीतिक शिष्टाचार और संस्कारों का निर्वहन किया। यह दृश्य विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनावों में यही दोनों नेता एक-दूसरे के आमने-सामने थे। राजेश अग्रवाल ने टीएस सिंह देव को हराकर पहली बार विधायक और मंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया था। ऐसे में, चुनाव की तल्खी के बीच इस तरह की मुलाकात और सम्मानजनक व्यवहार ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बटोरी है।
साइन अप,
बोनस सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
डायमंड इनवाइट,







