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💢मोबाइल कमेंट💢सारभरतपुर के बिहारी जी मंदिर के परिक्रमा मार्ग पर स्थित श्रीकृष्ण भगवान की पत्थर की चरण पादुका मूर्ति लंबे समय से खंडित पड़ी है। भाजपा की पूर्व पार्षद जितेंद्र कौर ने खंडित मूर्ति के विधिवत विसर्जन और नई मूर्ति स्थापना की मांग को लेकर मंदिर गेट के समीप भगवान के चरणों में धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
️कमाई फ्रेंड्स,छतरपुर मोबाइल की स्क्रीन टूटने पर कक्षा 10वीं में पढ़ने वाले 17 साल के नाबालिग द्वारा जहर खाने का मामला सामने आया है। परिजन गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर आए, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसे मेडिसन वार्ड में भर्ती कराया गया तो वहीं उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
भिवानी। शहर में सीवरेज समस्या के समाधान के लिए रात के समय भी सुपर सकर मशीन से सीवरेज लाइनों की सफाई की जा रही है। डीसी साहिल गुप्ता के सख्त निर्देश के बाद जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने दिल्ली से सुपर सकर मशीन मंगवाई हैं।
ईज़ी लाइक, कैदी ने जेल की छत से कूदकर की आत्महत्या- फोटो : credit
T20 WCसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालWest Bengalविकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?यूपीBihar Newsप्रत्यक्ष कर संग्रह में 9% का उछालदिल्ली में फिर टूटा ठंड का रिकॉर्डअंबरनाथ नगर परिषद
सारगणतंत्र दिवस 2026 पर मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में बंद 87 आजीवन कारावास के बंदियों को समयपूर्व रिहाई की अनुमति दी है। यह फैसला सुधारात्मक न्याय और अच्छे आचरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सारबीजापुर जिले में माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन के दौरान बड़ी साजिश को नाकाम किया गया है।सीआरपीएफ की 214वीं वाहिनी की टीम एफओबी कांडलापर्ती-2 से क्षेत्र में गश्त एवं सर्च ऑपरेशन के लिए निकली थी।
विथड्रॉ विथड्रॉ, विस्तारFollow Usइंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की जल गुणवत्ता जांच व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है। इस घटना के बाद जांच की सुई सीधे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग पर टिक गई है, जो प्रदेश में पेयजल और औद्योगिक जल की गुणवत्ता जांच का जिम्मा संभालता है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेशभर में 155 प्रयोगशालाएं होने के बावजूद पूरे मध्यप्रदेश में सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट पदस्थ हैं।
बड़ा अर्न संवाद न्यूज एजेंसी पीडीडीयू नगर। रौबदार कद काठी, भारी आवाज और चेहरे पर ताव देती मूंछे, यही कभी पुलिस की पहचान हुआ करती थी। खास तौर पर मूंछ का पुलिस में विशेष महत्व होता था। मूंछों को मेंटेन करने के लिए विभाग में इसके लिए अलग से भत्ता तक दिया जाता है लेकिन चंदौली जिले में इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक एक भी पुलिसकर्मी ऐसा नहीं हो जो मूंछों को ताव देता हो।
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