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💢सुपर ईज़ी💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़Published by:निवेदिता वर्माUpdated Tue, 13 Jan 2026 09:14 AM IST
️कमाई,विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ में 9 से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी पर विवाद गहरा गया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने खुद को भारत स्काउट गाइड की राज्य परिषद का अध्यक्ष बताते हुए आयोजन को स्थगित करने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है।
चंडीगढ़। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने सुभाष चन्द्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह वार्षिक पुरस्कार आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थानों के अमूल्य योगदान व निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करने के उद्देश्य से दिया जाता है। पुरस्कार की घोषणा हर साल 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर की जाती है।
पैसे, सारCG Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ आखिरकार नक्सल मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। पुलिस और सुरक्षाबलों की मदद से बीजापुर में एक बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर जिले में मंगलवार को 34 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है।
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से आयोजित होने वाली चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के 40 दिन बाद बिहार लौटते ही राजद भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पार्टी ने अब शिक्षक अभ्यर्थियों के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। राजद ने मांग की है कि चौथे चरण में कम से कम एक लाख पदों पर बहाली निकाली जाए।
विस्तारFollow Usबिलासपुर शहर में आज करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत का दौरा रहा। उन्होंने शहर पहुंचते ही क्षत्रिय समाज की बड़ी बैठक ली और साफ कहा कि 7 दिसंबर को रायपुर में देशभर का क्षत्रिय समाज एकजुट होकर जबरदस्त प्रदर्शन करेगा। यह प्रदर्शन वीरेंद्र सिंह तोमर के समर्थन में किया जाएगा, जिनके साथ पुलिस द्वारा की गई कथित अभद्रता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश बढ़ रहा है।
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Sun, 11 Jan 2026 12:58 PM IST
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सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।
ईज़ी फ्री, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:अर्पित याज्ञनिकUpdated Mon, 12 Jan 2026 05:52 PM IST







