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️पुराना लाइक,सारJodhpur News: जोधपुर में आयोजित दो दिवसीय सेना भर्ती रैली में 10 जिलों से 90% से अधिक युवाओं ने भाग लिया। ड्रग टेस्ट और सुरक्षा प्रबंध सख्त रहे। महिला सैन्य पुलिस की भर्ती भी पूरी हुई। सफल उम्मीदवारों का प्रशिक्षण 1 जुलाई 2026 से शुरू होगा।
बलरामपुर। गिरफ्तारी में बाधा पहुंचाने वाले को 34 वर्ष बाद सजा मिली है। सिविल जज जूनियर डिवीजन/न्यायिक मजिस्ट्रेट उतरौला योगेश कुमार चौधरी ने शनिवार को मुकदमों की सुनवाई के दौरान न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने दोषी पर दो हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
फ्रेंड्स इंस्टेंट, सारअल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी की कमी के बीच आठ असिस्टेंट प्रोफेसरों की तैनाती से चिकित्सा सेवाओं और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई को राहत मिली है।
सारBaran News:जिले के ग्राम पंचायत दांता में सरकारी पैसे के बंदरबाट का एक नजारा देखने के लिए मिला है। जहां विधायक कोष से बनने वाले चबूतरे के नाम पर ठेकेदार ने पुराने चबूतरे की मरम्मत करके खानापूर्ति कर दिया है।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ाPublished by:बांसवाड़ा ब्यूरोUpdated Fri, 21 Nov 2025 06:39 PM IST
सारSRN Hospital : एसआरएन अस्पताल के टैक्निशिनय और रेडियोलॉजिस्ट के छात्रों ने हड़ताल शुरू कर दी है। इससे अस्पताल में 12 घंटे से एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और पैथालॉजी समेत सभी जांच बंद हैं। टैक्निशियन छात्र का आरोप है कि ड्यूटी का समय पूरा हो जाने के बाद भी जूनियर डॉक्टर ने उस पर काम करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर पिटाई की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। मामले की जांच के लिए सीएमएस डॉ. नीलम सिंह ने डॉ. मोहित जैन के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
दैनिक इनवाइट, सारभाटापारा ग्रामीण क्षेत्र में बोरतरा फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से चरवाहा महिला की मौत हो गई। हादसे में उसकी 16 बकरा-बकरियां भी मारी गईं। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
विशेष स्टूडेंट
जिले के घाटोल ब्लॉक में गुरुवार का दिन विधवा महिला देवु बाई के लिए उम्मीद और रोशनी लेकर आया। पिछले 14 साल से अंधेरे में जीवन गुजार रही देवु का घर आखिरकार बिजली की रोशनी से जगमगा उठा। पति की मौत के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उठाने वाली 50 वर्षीय देवु की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वह साल 2011 के बाद बिजली का बिल नहीं चुका पाई और उसका कनेक्शन कट गया। तब से परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर था।
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