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️ऑनलाइन इनवाइट,विस्तारFollow Usराजधानी भोपाल के करोंद स्थित अमन कॉलोनी ईरानी डेरे से देश के 14 राज्यों में सक्रिय ईरानी गैंग के सरगना से भोपाल पुलिस पूछताछ कर रही है। इस गैंग के मुख्य आरोपी आबिद अली उर्फ राजू ईरानी को सूरत पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद भोपाल पुलिस ने उसे ट्रांजिट वारंट पर भोपाल लाकर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 17 जनवरी तक रिमांड पर लिया गया है। पुलिस को उसकी लगभग सात साल से तलाश थी। वर्ष 2017 में उसके खिलाफ आगजनी का प्रकरण दर्ज हुआ था, तब से वह छुपकर भोपाल में ही रहता रहा और पुलिस को चकमा देता रहा।
भिवानी। शहर में सोमवार को न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जिससे यह दिन इस सीजन का सबसे ठंडा दिन बन गया। सुबह से शीतलहर और कोहरे का असर देखा गया वहीं दोपहर में हल्की धूप निकलने के बावजूद ठंड का असर जारी रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। सोमवार की सुबह की शुरुआत कोहरे और शीतलहर के साथ हुई।
अतिरिक्त अर्न, पक्का मकान अब बाधा नहीं, आयु सीमा बढ़ने से पहले निरस्त आवेदन भी होंगे शामिल
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:Digvijay SinghUpdated Tue, 09 Dec 2025 10:43 PM IST
मोदी सरकार ने दो साल पहले सीएम नीतीश की 'भारत रत्न' पर बड़ी मुराद पूरी की थी। इस बार क्या है चर्चा?- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विन ईज़ी बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। फेंगुआ के दागनभुआ में समीर दास (28) को पीट-पीटकर मार डाला गया। आरोपी उसका ऑटो लूटकर फरार हो गए। पुलिस हत्यारों की तलाश कर रही है। पिछले 25 दिन में बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या का यह आठवीं वारदात है।
सारBundi Accident: बूंदी जिले में चौथ माता मंदिर पैदल जा रहे श्रद्धालुओं पर कपास से भरा ट्रक पलट गया। हादसे में तीन की मौत, आठ से अधिक घायल हुए। कोटा एमबीएस में इलाज जारी है। विधानसभा अक्ष्यक्ष ओम बिरला ने अस्पताल पहुंचकर आवश्यक निर्देश दिए।
सर्वे, विस्तारFollow Usजाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।







