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इनवाइट कमेंट

💢सुपर रजिस्टर💢वाराणसी ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:15 AM IST

️अर्न इनवाइट,सारजिले के नापासर गांव में कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने टीम के साथ छापा मारकर डेढ़ लाख लीटर इंटस्ट्रियल ऑयल बरामद किया।

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की जल गुणवत्ता जांच व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है। इस घटना के बाद जांच की सुई सीधे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग पर टिक गई है, जो प्रदेश में पेयजल और औद्योगिक जल की गुणवत्ता जांच का जिम्मा संभालता है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेशभर में 155 प्रयोगशालाएं होने के बावजूद पूरे मध्यप्रदेश में सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट पदस्थ हैं।

क्लिक, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेरPublished by:मुंगेर ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:18 PM IST

चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 02:11 AM IST

सारउप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली प्री-बजट बैठक में शामिल हुए। उन्होंने मध्यप्रदेश के विकास, बजटीय प्रबंधन और सिंहस्थ-2028 के लिए 20 हजार करोड़ के विशेष पैकेज की मांग रखी।

शहाबगंज। क्षेत्र के केरायगांव में माईनर का पानी घुसने से 10 बीघा खेत जलमग्न हो गया। सूचना पर किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र का भ्रमण कर अधिकारियों को सूचित किया। खेतों में पानी घुसने से पौधों के खराब होने की आशंका है।

अर्न रजिस्टर, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Fri, 03 Oct 2025 08:12 PM IST

बड़ा विथड्रॉ

चंबा। वन मंडल चंबा में कशमल की जड़ों के दोहन को लेकर स्थानीय लोग व ठेकेदार आमने सामने हो गए हैं। अब तक ठेकेदार लोगों को दस रुपये प्रति किलो की दर से कशमल जड़ों का दाम दे रहे थे जबकि दवा कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग दाम बढ़ाने की मांग पर अड़ गए हैं। अब वे दस रुपये की जबह 18 रुपये प्रति किलो दाम देने की मांग कर रहे हैं। यह दाम चुकाने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हाे रहे हैं। इसके चलते कशमल दोहन क्षेत्र में थम गया है। हालांकि, कुछ इलाकों में लोग इसके दोहन का विरोध भी कर रहे हैं। कुछ मात्रा में उन्होंने उखाड़ी गई कशमल को जलाया भी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग अब दाम बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब लोगों व ठेकेदार के बीच में फंस गया है। विभाग चाहकर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विभाग के कर्मचारी सही तरीके से कशमल दोहन पर निगरानी रख सकते हैं। ये जड़ें स्थानीय लोग किस दाम पर बेच रहे हैं और ठेकेदार आगे किस दाम पर बेच रहा है, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है।

विन विन, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंडPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Wed, 15 Oct 2025 07:48 PM IST

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